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देश की तंग गलियों से निकलकर हर कोने तक पहुंचा ‘YellowDots’ का जादुई सफर

देशभर के युवाओं के लिए शिक्षा, AI स्किल और रोजगार के अवसरों से जुड़ी एक नई डिजिटल पहल शुरू की गई है। YellowDots Talent Digital Public Infrastructure (DPI) को अब देशभर के युवाओं के लिए लाइव कर दिया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर युवाओं को

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New Delhi: सोचिए, किसी दूर-दराज के गांव या कस्बे में रात के सन्नाटे में मिट्टी के तेल के दीये या टेबल लैंप की मद्धिम रोशनी में कोई छात्र किताबों में सिर गड़ाए बैठा है। उसकी आँखें जल रही हैं, पर सपनों की चमक फीकी नहीं पड़ी है। उसके भीतर एक ही टीस बार-बार उठती है—“क्या मेरी यह मेहनत, दिल्ली या कोटा के बड़े-बड़े वातानुकूलित कोचिंग सेंटरों में लाखों रुपये उड़ाने वाले बच्चों से मुकाबला कर पाएगी?”

सच कहें तो, अब तक हमारे देश में शिक्षा और सफलता के मायने पैसों से तय होते थे। काबिलियत पीछे छूट जाती थी और जेब का वजन आगे आ जाता था। लेकिन, इस कड़वी सच्चाई को बदलने और आर्थिक लाचारी की दीवार को हमेशा के लिए गिराने के लिए अब जमीन पर एक ऐसी डिजिटल क्रांति उतर आई है, जो बड़े शहरों और छोटे गाँवों की इस लंबी दूरी को एक झटके में मिटा देगी।

गाजियाबाद और विशाखापत्तनम में झंडे गाड़ने के बाद, ‘येलोडॉट्स’ (YellowDots) नाम का यह टैलेंट डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) अब देश के हर एक नौजवान के लिए पूरी तरह से लाइव कर दिया गया है। गांधी जयंती के पवित्र मौके पर शुरू हुई यह पहल उन तमाम परिवारों के लिए उम्मीद की एक ऐसी किरण है, जिनके बच्चों के हौसले तो आसमान छूते हैं, पर जेब में कोचिंग की भारी-भरकम फीस भरने के पैसे नहीं होते।

यह कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है। बीते 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने एक सपना रखा था—एक ऐसा डिजिटल तंत्र जहाँ देश के एक करोड़ युवाओं को आधुनिक एआई (AI) तकनीक से जोड़ा जा सके और घर-घर तक मुफ्त कोचिंग पहुंचाई जा सके। येलोडॉट्स उसी सपने की ज़मीनी हकीकत है।

एक ही छत के नीचे… कोचिंग भी, उस्ताद भी और आईआईटी का ठप्पा भी!

इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि यह सिर्फ एक रटी-रटाई वेबसाइट नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मुकम्मल ठिकाना है जहाँ एक छात्र को आगे बढ़ने के लिए जिन तीन सबसे बड़ी चीज़ों की जरूरत होती है, वे सब थाली में परोसी हुई सी मिल रही हैं—और वो भी बिल्कुल मुफ्त!

  1. मुअब कोचिंग के लिए पैसे रोने की ज़रूरत नहीं: पहली और सबसे राहत भरी बात यह है कि ‘करियर लॉन्चर’ (Career Launcher) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का तीन दशकों का अनुभव और उनका बेहतरीन स्टडी मटीरियल अब हर आम छात्र के लिए फ्री है। अब किसी को महंगे नोट्स या टेस्ट सीरीज़ खरीदने के लिए घर में अनाज बेचने या कर्ज लेने की मजबूरी नहीं होगी।

  2. पर्सनल एआई ट्यूटर (आपका अपना डिजिटल उस्ताद): अक्सर होता यह है कि बड़े कोचिंग संस्थानों की भीड़-भाड़ वाली क्लास में शर्मीले या थोड़े कमजोर छात्र सवाल पूछने से डरते हैं कि कहीं बाकी लोग हँस न दें। इस समस्या का ऐसा तोड़ निकाला गया है कि आप दंग रह जाएंगे! आईआईटी खड़गपुर और फर्मी एआई ने नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी के साथ मिलकर एक ऐसा एआई ट्यूटर तैयार किया है, जो 24 घंटे आपके साथ रहेगा। यह आपकी रफ्तार से सीखेगा। अगर आपको एक ही सवाल सौ बार पूछना पड़े, तो यह बिना झुंझलाए, बड़े प्यार से और आसान उदाहरण देकर तब तक समझाएगा जब तक आपकी खोपड़ी में बात पूरी तरह उतर न जाए।

  3. आईआईटी खड़गपुर का एआई प्रोफिशिएंसी सर्टिफिकेट: ज़माना बदल रहा है और आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की समझ के बिना गाड़ी नहीं चलने वाली। आईआईटी खड़गपुर के दिग्गजों ने ऐसा पाठ्यक्रम तैयार किया है जो सिर्फ किताबी नहीं है, बल्कि सीधे कंपनियों और नियोक्ताओं की कसौटी पर खरा उतरता है। जब छोटे शहर के लड़के या लड़की के हाथ में आईआईटी का यह सर्टिफिकेट होगा, तो बड़ी-बड़ी कंपनियों के दरवाजे खुद-ब-खुद उनके लिए खुल जाएंगे।

अब भूगोल तय नहीं करेगा कि आप कहां पहुंचेंगे

अभी तक होता यह था कि आपकी तरक्की इस बात पर तय होती थी कि आपका जन्म दिल्ली-मुंबई में हुआ है या झारखंड के किसी गुमनाम जिले के सुदूर गाँव में। आपके संपर्क (contacts) कैसे हैं, यह आपकी किस्मत तय करता था।

लेकिन येलोडॉट्स का साफ कहना है कि अब आपका पिनकोड आपकी तरक्की की राह नहीं रोकेगा। इस मुहिम के पीछे मायसाथी फाउंडेशन, करियर लॉन्चर, आईआईटी खड़गपुर और हेड हेड हाई फाउंडेशन जैसी कई बड़ी संस्थाएं एक साथ खड़ी हैं, जिन्हें ‘एक्स्पेप फाउंडेशन’ (EkStep Foundation) का मजबूत मार्गदर्शन मिल रहा है। आने वाले समय में इसे जिला स्तर पर प्रशासन के साथ मिलकर घर-घर तक पहुंचाने की योजना है, ताकि गाँव के अंतिम छोर पर बैठे लड़के या लड़की तक इसकी पहुँच पक्की हो सके।

आधार और यूपीआई के बाद अब ‘टैलेंट’ की बारी

जरा याद कीजिए कि जब आधार कार्ड और यूपीआई (UPI) आए थे, तो देश की आम ज़िंदगी में कितना बड़ा भूचाल आया था। चाय बेचने वाले से लेकर ठेले वाले तक की दुनिया बदल गई थी। ठीक उसी तरह, अब तकनीक के जरिए देश के आम युवाओं के ‘टैलेंट’ को सामने लाने की यह तीसरी सबसे बड़ी क्रांति है।

यह सिर्फ अकेले छात्रों के लिए नहीं है; देश के स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और तमाम सामाजिक संगठन (NGOs) भी अपने बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए इस सरकारी और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का खुलकर इस्तेमाल कर सकते हैं।

तो फिर इंतज़ार किस बात का? अगर आपके भी भीतर कुछ कर दिखाने का जज्बा है, तो आज ही yellowdots.ai पर जाइए, इस अनोखे डिजिटल परिवार से जुड़िए और अपनी मेहनत के दम पर अपनी तकदीर खुद लिख डालिए!

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