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हजरत मुहम्मद ﷺ के रास्ते पर चले बिना संभव नहीं विश्व शांति : हिदायतुल्ला खान

Ranchi : पैग़म्बर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद ﷺ की आमद के 1500 वर्ष पूरे होने पर झारखंड समेत पूरी दुनिया में जश्ने ईद मिलादुन्नबी की तैयारियां पूरे जोर-शोर से की जा रही हैं। इस मौके पर झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्ला खान ने कहा कि

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Ranchi : पैग़म्बर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद ﷺ की आमद के 1500 वर्ष पूरे होने पर झारखंड समेत पूरी दुनिया में जश्ने ईद मिलादुन्नबी की तैयारियां पूरे जोर-शोर से की जा रही हैं। इस मौके पर झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्ला खान ने कहा कि अगर दुनिया में अमन और सुकून कायम करना है तो पैगंबर हजरत मुहम्मद ﷺ के बताए रास्ते पर चलना ही एकमात्र विकल्प है।

उन्होंने कहा कि हजरत मुहम्मद ﷺ ने इंसानियत को जो जीवन जीने का तरीका बताया, वह पूरी दुनिया के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है। उनकी शिक्षाओं में गरीबों को भोजन कराना, बेसहारों की मदद करना, मुसाफिरों के लिए आसरा उपलब्ध कराना और प्यासों को पानी पिलाना जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का संदेश है। यही वजह है कि उनका संदेश हर दौर में प्रासंगिक बना हुआ है।

श्री खान ने आगे कहा कि हजरत मुहम्मद ﷺ की आमद का असली मकसद इंसान को जुल्म और सितम से आजाद कर एक ईश्वर की इबादत के जरिए पाक और नेक जिंदगी की ओर मोड़ना था। उन्होंने पूरी इंसानियत को न्याय, करुणा और समानता का पाठ पढ़ाया।

उन्होंने इस मौके पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों को भी साझा किया। गांधीजी ने अंग्रेजी शासनकाल में जेल के दौरान हजरत मुहम्मद ﷺ के जीवन का गहन अध्ययन किया था। उन्होंने उन्हें “सत्य के अन्वेषक और ईश्वर के सच्चे भक्त” बताया, जिन्होंने अत्याचार सहते हुए भी सत्य के मार्ग को नहीं छोड़ा।

हिदायतुल्ला खान ने कहा कि आज दुनिया कई संकटों और संघर्षों से जूझ रही है। ऐसे समय में अगर वैश्विक स्तर पर अमन और भाईचारा कायम करना है, तो हमें पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद ﷺ की शिक्षाओं को अपनाना होगा। यही वह रास्ता है जो इंसानियत को सच्ची शांति और भाईचारे की ओर ले जा सकता है।

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