रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दूरदर्शी सोच और ग्रामीण महिलाओं की कड़ी मेहनत के अनूठे संगम ने झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैश्विक ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है. ‘पलाश’ ब्रांड के तहत शुरू किए गए ‘झारखंड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव’ ने राज्य के किसानों और सखी मंडल की दीदियों की तकदीर बदल दी है. आज झारखंड का आम न केवल देश के बड़े रिटेल स्टोरों में बिक रहा है, बल्कि सात समंदर पार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मिठास घोल रहा है.
कोरोना काल की योजना आज बनी वरदान
दुबई और लंदन तक हुई आमों की सप्लाई
झारखंड के कृषि उत्पादों को अब वैश्विक पहचान मिल रही है. चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में सिमडेगा जिले से जेबी एक्सपोर्टर्स के जरिए 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम सीधे लंदन (यूके) भेजे गए हैं. वहीं, रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई (यूएई) निर्यात किए गए हैं. आमों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आईसीएआर-आरसीईआर (ICAR-RCER), पलांडू तकनीकी मार्गदर्शन दे रहा है.
अब तक लाखों का कारोबार, कॉर्पोरेट्स से भी हाथ मिलाने की तैयारी
सखी मंडल की दीदियाँ आम के कलेक्शन, ग्रेडिंग और पैकेजिंग से लेकर मार्केटिंग की कमान खुद संभाल रही हैं. आमों को उनकी क्वालिटी के आधार पर ग्रेड ए, बी और सी में बांटा गया है. ग्रेड-ए के प्रीमियम आम विदेशों में जा रहे हैं और घरेलू बाजार में पलाश व अपना मार्ट के आउटलेट्स पर ₹60 प्रति किलो की दर से बिक रहे हैं.
राज्य के 115 फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स (FPOs) के माध्यम से अब तक 2.24 लाख किलोग्राम से अधिक आमों की बिक्री हो चुकी है, जिससे ₹60.51 लाख से अधिक का कारोबार हुआ है. बाजार को और बड़ा करने के लिए अब ब्लिंकिट, रिलायंस फ्रेश और कशिश मॉल जैसे बड़े कॉर्पोरेट घरानों के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है.




