Social News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के ‘गॉडफादर’ कहे जाने वाले कंप्यूटर वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता जेफ्री हिंटन ने फिर AI को लेकर चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है। हिंटन ने कहा है कि आने वाले समय में AI की वजह से बड़े पैमाने पर बेरोजगारी देखने को मिल सकती है।
अमीर होंगे और अमीर, गरीब रह जाएंगे पीछे
कंपनियां अपने मुनाफे को बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की जगह AI का इस्तेमाल करेंगी। उनका कहना है कि यह AI की गलती नहीं, बल्कि पूंजीवादी व्यवस्था का परिणाम होगा, जिसमें लाभ को प्राथमिकता दी जाती है और मानवीय श्रम को कम करके अधिक कमाई का रास्ता तलाशा जाता है। उन्होंने कहा कि अभी तक बड़ी छंटनी के मामले सामने नहीं आए हैं, लेकिन शुरुआती सबूत साफ दिखाते हैं कि AI खासतौर पर एंट्री-लेवल नौकरियों को कम कर रहा है। यह वही नौकरियां होती हैं, जिनसे कॉलेज से निकले नए युवा अपने करियर की शुरुआत करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि धीरे-धीरे अमीर तबका और बड़ी कंपनियां AI को अपनाकर कार्यबल को घटाएंगी। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी और अमीर और ज्यादा अमीर होंगे, जबकि गरीब और पिछड़ जाएंगे।
AI से बेरोजगारी का खतरा
हिंटन ने कहा, “हकीकत यह है कि अमीर लोग AI का इस्तेमाल वर्कर्स को हटाने के लिए करेंगे। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी और कुछ लोगों की जेबें और भरेंगी, जबकि ज्यादातर लोग और गरीब होंगे।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि AI कंपनियां लंबे समय के खतरों और संभावित नुकसान की बजाय केवल अल्पकालिक मुनाफे पर ध्यान देती हैं। पिछले महीने भी उन्होंने कहा था कि यह प्रवृत्ति आने वाले समय में समाज में गहरी खाई पैदा कर सकती है। इस बीच, न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक ने AI पर एक सर्वे किया।
इसमें पता चला कि AI अपनाने वाली कई कंपनियां मौजूदा कर्मचारियों को हटाने के बजाय उन्हें री-ट्रेन करने पर ध्यान दे रही हैं। हालांकि, सर्वे ने यह भी चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में छंटनी का खतरा बढ़ सकता है। इसका सीधा असर उन क्षेत्रों पर पड़ेगा, जहां सामान्य और दोहराव वाले कार्य ज्यादा हैं। हिंटन ने हेल्थकेयर क्षेत्र को लेकर एक अलग दृष्टिकोण पेश किया। उन्होंने कहा कि यह ऐसा सेक्टर है, जो AI से होने वाले जॉब क्राइसिस से काफी हद तक बचा रहेगा।
जून में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “अगर डॉक्टरों को पांच गुना ज्यादा कुशल बनाया जाए तो हम उसी कीमत पर पांच गुना ज्यादा हेल्थकेयर पा सकते हैं। मरीज हमेशा ज्यादा और बेहतर इलाज चाहते हैं, खासकर जब इसकी लागत न बढ़े।” उनका मानना है कि बोरिंग और साधारण कार्यों वाली नौकरियां AI आसानी से ले लेगा, लेकिन जिन कामों में उच्च कौशल और मानवीय निर्णय की आवश्यकता होती है, वे अभी सुरक्षित रहेंगे।
हालांकि, यह सुरक्षा भी लंबे समय तक कायम नहीं रह सकती क्योंकि AI लगातार तेज़ी से विकसित हो रहा है। जेफ्री हिंटन की यह भविष्यवाणी ऐसे समय में आई है जब पूरी दुनिया में AI का विस्तार तेजी से हो रहा है। एक ओर जहां कंपनियां लागत घटाने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए AI का इस्तेमाल कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों युवाओं की नौकरी की संभावनाएं खतरे में हैं।



