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रांची: विकास और परंपराओं के बीच सामंजस्य बिठाने की कवायद में आज कांके प्रखंड के ग्रामीणों ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। कांके के मौजा-टेण्डर अंतर्गत ‘हड़गड़ी’ जमीन पर प्रस्तावित झारखंड जगुआर (STF) कैंप के विस्तार को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी प्रतिनिधियों ने उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री से मुलाकात की और अपनी चिंताओं से अवगत कराया।
आस्था का केंद्र है ‘हड़गड़ी’ जमीन
मुलाकात के दौरान ग्रामीणों ने उपायुक्त को विस्तार से बताया कि जिस जमीन पर झारखंड जगुआर कैंप के विस्तार का प्रस्ताव है, वह केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं है। यह आदिवासी समाज की सदियों पुरानी आस्था, परंपराओं और पूर्वजों की यादों से जुड़ी ‘हड़गड़ी’ (शवाधान स्थल) है। ग्रामीणों का कहना है कि यहाँ वर्षों से पूजा-अर्चना और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित होती आ रही हैं। उन्होंने प्रशासन से भावुक अपील करते हुए कहा कि समाज की भावनाओं का सम्मान किया जाए और कैंप विस्तार के लिए किसी वैकल्पिक भूमि की व्यवस्था की जाए।
प्रशासन की कार्यशैली की सराहना
जहाँ एक ओर ग्रामीण अपनी जमीन को लेकर चिंतित दिखे, वहीं दूसरी ओर उन्होंने रांची जिला प्रशासन की कार्यकुशलता की जमकर सराहना भी की। हाल ही में संपन्न हुए सरहुल पर्व को बेहद शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से आयोजित कराने के लिए ग्रामीणों ने प्रशासन का आभार जताया। इस मौके पर ग्रामीणों ने उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री को शॉल ओढ़ाकर और गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया। यह दृश्य प्रशासन और जनता के बीच बढ़ते विश्वास का प्रतीक नजर आया।
बैठक में प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की और वार्ड पार्षद अमित मिंज सहित भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। ग्रामीणों ने विश्वास जताया कि उपायुक्त उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को समझते हुए उचित निर्णय लेंगे। उपायुक्त ने भी ग्रामीणों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और मामले पर गौर करने का आश्वासन दिया।

