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5 अप्रैल को विकट चतुर्थी: दूर होंगे हर संकट, नोट करें शुभ समय

Spiritual Desk: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को ‘विकट संकष्टी’ कहा जाता है। इस वर्ष यह पावन तिथि 5 अप्रैल, रविवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश

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Spiritual Desk: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को ‘विकट संकष्टी’ कहा जाता है। इस वर्ष यह पावन तिथि 5 अप्रैल, रविवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में से एक ‘विकट’ रूप की इस दिन पूजा करने से भक्तों के जीवन के सभी ज्ञात-अज्ञात भय, रोग और शोक का नाश होता है। यह व्रत न केवल व्यक्ति को निर्भीक बनाता है, बल्कि कठिन परिस्थितियों से लड़ने का साहस भी प्रदान करता है।

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व्रत और पूजा का विधान 5 अप्रैल को चतुर्थी तिथि दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से प्रारंभ होगी। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखेंगे और शाम को चंद्रमा के उदय होने के बाद पूजन और अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगे। ऐसी मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत बिना चंद्र दर्शन के पूर्ण नहीं माना जाता है।

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5 अप्रैल 2026: समय सारिणी (नई दिल्ली)

  • सूर्योदय: सुबह 06:07 बजे

  • सूर्यास्त: शाम 06:41 बजे

  • चंद्रोदय: रात 09:58 बजे (व्रत पारण का समय)

शुभ और अशुभ मुहूर्त (जरूरी जानकारी)

भगवान की आराधना और शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यहाँ 5 अप्रैल के लिए समय विवरण दिया गया है:

शुभ समय (Auspicious Timing):

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:35 से 05:21 तक

  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:59 से 12:49 तक

  • अमृत काल: दोपहर 02:24 से 04:10 तक (विशेष फलदायी)

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:20 तक

  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:40 से 07:03 तक

अशुभ समय (Inauspicious Timing):

  • राहुकाल: शाम 05:07 से 06:41 तक (इस दौरान शुभ कार्य वर्जित हैं)

  • भद्रा: सुबह 06:07 से दोपहर 11:59 तक

  • यमगण्ड: दोपहर 12:24 से 01:58 तक

  • गुलिक काल: दोपहर 03:33 से 05:07 तक

धार्मिक मान्यता है कि विकट गणेश अपने भक्तों की सभी प्रकार के ज्ञात-अज्ञात भय, रोग, शोक और दुर्घटनाओं से रक्षा करते हैं। यह व्रत न सिर्फ व्यक्ति को निर्भीक बनाता है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करने का साहस भी प्रदान करता है। घोर संकटों में भी भक्तों की रक्षा करने वाले विकट गणेश अपराजेयता का वरदान देते हैं।

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