रांची: पिछले कुछ सप्ताह रांची के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक उल्लास से भरे रहे। रामनवमी की भव्य शोभायात्रा हो, सरहुल की थिरकन हो, रमजान की इबादत हो या ईद की मिठास, इन सभी त्योहारों ने रांची की सड़कों पर भाईचारे की एक नई पटकथा लिखी है। जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जिला प्रशासन ने इस अभूतपूर्व शांति और अनुशासन के लिए समस्त रांचीवासियों को ‘सैल्यूट’ किया है।

साझा विरासत और अटूट विश्वास

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि यह केवल त्योहारों का समापन नहीं है, बल्कि हमारी साझा संस्कृति और अटूट विश्वास की जीत है। उन्होंने कहा कि जिस गरिमा और आपसी सम्मान के साथ रांची ने इन पर्वों को मनाया, वह पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणा है।

इन समितियों की रही अहम भूमिका

प्रशासन ने विशेष रूप से विभिन्न धार्मिक और सामाजिक समितियों के समर्पण की सराहना की है। इनमें शामिल हैं:

  • महावीर मंडल, तपोवन मंदिर पूजा समिति और रामनवमी श्रृंगार समिति

  • केन्द्रीय सरना समिति और विभिन्न सरना समितियां

  • सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया और गुरुनानक समिति

  • चैती दुर्गा पूजा समिति एवं सभी अखाड़ा समितियां

उपायुक्त ने कहा कि इन संगठनों ने न केवल आयोजन किए, बल्कि बेहद संवेदनशीलता और परिपक्वता दिखाते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का दाहिना हाथ बनकर काम किया।

पर्दे के पीछे के नायक

इस सफलता के पीछे पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारियों, नगर निगम, बिजली विभाग (लाइन डिपार्टमेंट) और मीडिया प्रतिनिधियों की दिन-रात की मेहनत रही। जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी और जनता की सतर्कता ने यह सुनिश्चित किया कि कहीं भी कोई अप्रिय स्थिति न बने।

भविष्य के लिए संदेश

मंजूनाथ भजंत्री ने विश्वास जताया कि रांचीवासी भविष्य में भी इसी तरह आपसी विश्वास और सहिष्णुता के साथ हर त्योहार मनाएंगे। उन्होंने कहा कि रांची की विशिष्ट पहचान उसकी सांस्कृतिक विविधता में छिपी एकता है, जिसे हर नागरिक ने अपने व्यवहार से और अधिक सशक्त किया है।

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