Interesting News: दूसरे विश्व युद्ध और उसके बाद की लड़ाइयों में अमेरिका के करीब 40,000 सैनिक समुद्र में लापता हो गए थे। दशकों से इन सैनिकों की तलाश की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अब इस मिशन में नई तकनीक एक बड़ी उम्मीद के रूप में सामने आई है। अमेरिकी वैज्ञानिकों और डिफेंस पीओडब्ल्यू/एमआईए अकाउंटिंग एजेंसी (DPAA) ने एक नई रिसर्च शुरू की है, जिसमें एनवायरमेंटल डीएनए यानी ईडीएनए की मदद से समुद्र में मौजूद मानव अवशेषों के संभावित स्थानों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। यह तकनीक समुद्री पानी और तलछट में मौजूद सूक्ष्म डीएनए कणों को पकड़कर संकेत देती है कि क्या उस जगह किसी समय मानव अवशेष मौजूद रहे थे।
ईडीएनए: समुद्र के नीचे तलाश आसान करने वाला नया हथियार
DPAA के चीफ ऑफ इनोवेशन जेसी स्टीफन बताते हैं कि समुद्र के नीचे जांच बेहद मुश्किल होती है, क्योंकि समय के साथ अवशेष बिखर जाते हैं। पारंपरिक खुदाई और खोज अभियान बेहद महंगे, समय लेने वाले और कई बार असफल साबित होते हैं। यही वजह है कि ईडीएनए को वैज्ञानिकों ने ‘बायोलॉजिकल स्काउट’ के रूप में अपनाया है। यह तकनीक समुद्र की गहराइयों में बिना भारी उपकरण उतारे भी संभावित स्थानों का पता लगाने में मदद करती है, जिससे खोज अभियान की सटीकता बढ़ जाती है।
जहाजों और विमानों में दबे रहस्यों की तलाश
इस रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों ने साइपन के बंदरगाह में मौजूद एक पुराने विमान से शुरुआत की। इसके साथ ही इटली और लेक ह्यूरॉन (अमेरिका–कनाडा) में मौजूद 12 जहाजों और विमानों से पानी और तलछट के नमूने इकट्ठे किए गए। साइपन में मौजूद अमेरिकी विमान—ग्रुम्मन टीबीएफ एवेंजर—दूसरे विश्व युद्ध की 1944 की बैटल ऑफ साइपन में गिरा था। इसमें तीन सैनिक सवार थे, जिनमें से दो के अवशेष आज तक नहीं मिले। वैज्ञानिकों ने अब इस विमान समेत कई मलबों से नमूने लैब में भेजे हैं, जहां उनका विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि क्या आसपास मानव डीएनए के अंश मौजूद हैं। अगर यह तकनीक सफल साबित होती है, तो समुद्र में खोए हजारों सैनिकों की पहचान की राह काफी आसान हो सकती है।



