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Tehran, (Iran): पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर (युद्धविराम) की ऐतिहासिक घोषणा के बीच दो महाशक्तियों—अमेरिका और ईरान—के बीच एक नया और गंभीर सैन्य टकराव खड़ा हो गया है। कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पहुंचे भारी नुकसान को लेकर दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

ईरान की शक्तिशाली सेना ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कड़े शब्दों में दावा किया है कि इस एयरपोर्ट को हुआ नुकसान किसी ईरानी मिसाइल या ड्रोन हमले के कारण नहीं हुआ है। आईआरजीसी के प्रवक्ता के मुताबिक, यह तबाही दरअसल वहां तैनात अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम (Patriot Air Defense System) में आई तकनीकी खराबी और उसके मिसफायर होने का नतीजा थी। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसके सैन्य बलों का कुवैत एयरपोर्ट हादसे से कोई सीधा या परोक्ष संबंध नहीं है।
ओमान सागर में अमेरिकी युद्धपोत पर हमले का रहस्य
दूसरी ओर, ओमान सागर (Gulf of Oman) में एक अमेरिकी युद्धपोत पर कथित हमले के दावे को लेकर भी दोनों देशों के बीच सीधा कूटनीतिक गतिरोध देखने को मिल रहा है। ईरानी मीडिया हलकों में कल से ही यह दावा प्रमुखता से किया जा रहा था कि ईरानी नौसेना ने ओमान सागर में एक अमेरिकी सैन्य पोत को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। ईरान का आरोप है कि यह अमेरिकी युद्धपोत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के रूप में काम करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन कर ईरानी जलक्षेत्र (Territorial Waters) के बेहद करीब पहुंच गया था।
हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। सेंटकॉम ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि ईरान की ओर से किया गया यह दावा पूरी तरह से झूठा, बेबुनियाद और भ्रामक है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने साफ किया कि उनके सभी सैन्य संसाधन समुद्र में पूरी तरह सुरक्षित हैं और बिना किसी बाधा के अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अपना नियमित अभियान चला रहे हैं।
युद्धविराम के बाद भी सुलग रहा पश्चिम एशिया
यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम को लेकर एक नया और महत्वपूर्ण समझौता धरातल पर उतरा है। इसके बावजूद पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। व्हाइट हाउस ने आधिकारिक घोषणा की है कि इजरायल और लेबनान युद्धविराम की कड़ी शर्तों पर पूरी तरह सहमत हो गए हैं। हालांकि, इस वैश्विक शांति समझौते की घोषणा के तुरंत बाद ही ईरान और अमेरिका के बीच नए सिरे से आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर शुरू हो गया।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय (US State Department) के अनुसार, यह समझौता हिजबुल्लाह की ओर से इजरायली क्षेत्रों पर गोलाबारी पूरी तरह बंद करने और दक्षिण लितानी सेक्टर के सुरक्षा क्षेत्र से उसके लड़ाकों की सुरक्षित वापसी जैसी बेहद कड़ी शर्तों पर आधारित है। इस पूरे क्षेत्र में शांति को स्थायी बनाने के उद्देश्य से दोनों पक्षों के बीच आगामी 22 जून 2026 को फिर से एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें एक व्यापक और स्थायी शांति समझौते की अंतिम रूपरेखा तैयार करने की कोशिश की जाएगी।

