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World News: ईरान में जल रही विरोध की आग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसी चाल चली है, जिसने तेहरान के सत्ता गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को ‘अगवा’ करवाने जैसी चर्चाओं के बाद अब ट्रंप की धमकियों को दुनिया बेहद गंभीरता से ले रही है। ट्रंप प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर ईरान से उन 8 राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने को कहा है, जो लंबे समय से खामेनेई शासन की आंखों की किरकिरी बने हुए हैं।
नोबेल विजेता से लेकर छात्र नेताओं तक, ये हैं वो 8 नाम
1. नरगिस मोहम्मदी – 2023 में शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली नरगिस मोहम्मदी ईरानी महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं। 53 साल की नरगिस मोहम्मदी एक लेखिका हैं और डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर (डीएचआरसी) की उप निदेशक भी हैं। महिला अधिकारों के अलावा वहां अन्य मानवाधिकार मुद्दों पर भी काम करती हैं।
2. सपीदेह गोलियान – ईरान की महिला अधिकार कार्यकर्ता गोलियान खामेनेई शासन के निशाने पर रही हैं और कई बार जेल जा चुकी हैं। गोलियान एक लेखिका और फ्रीलांस पत्रकार भी हैं जो कि महिला अधिकारों और महिला श्रम के क्षेत्र में काम करती हैं। हड़ताल कर रहे श्रमिकों के समर्थन के लिए गोलियान को पहली बार 2018 में गिरफ्तार किया था और 11 जून 2025 को रिहा किया गया। हालांकि, मोहम्मदी के साथ इन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि ये भी स्मृति सभा का हिस्सा थीं।
3. जवाद अली – कोर्दी-अली-कोर्दी ईरान के मानवाधिकार वकील, यूनिवर्सिटी लेक्चरर और सिटी काउंसिल के पूर्व सदस्य हैं। 1 मार्च 2025 को इन्हें मशहद स्थित उनके ऑफिस से गिरफ्तार किया और ईरान के खिलाफ प्रोपेगेंडा के आरोप में हिरासत में लिया। उन्हें 11 अगस्त 2025 को रिहा किया गया, लेकिन अधिकारियों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और कंट्रोल में रखा गया। उनके भाई और सहकर्मी खोसरो अली-कोर्दी की दिसंबर में मौत हो गई थी जिसके लिए आयोजित श्रद्धांजलि सभा में ही नरगिस मोहम्मदी और गोलियान को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की।
4. पूरान नाजेमी – नाजेमी ईरान के करमान प्रांत से हैं और महिला और नागरिक अधिकारों के लिए काम करती हैं। इन्हें भी नोबेल पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी के साथ गिरफ्तार किया गया था।
5. रजा खंदान – खंदान ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और ग्राफिक डिजाइनर हैं। इन्होंने हिजाब आंदोलन के दौरान प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था और मौत की सजा के खिलाफ भी आवाज उठाते रहे हैं। इन्हें 2018 और 2021 के बीच कई बार जेल भेजा जा चुका है। 14 दिसंबर 2024 को ईरानी अधिकारियों ने उन्हें उनके घर से गिरफ्तार किया और अभी वो जेल में ही हैं।
6. मजीद तवक्कोली – तवक्कोली ईरान के स्टूडेंट लीडर और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं जो लंबे समय से जेल में हैं। छात्रों के समर्थन में सरकार की आलोचना के लिए 2009 में पहली बार वे जेल गए थे। ईरानी शासन की आलोचना को लेकर फिलहाल वो 9 साल की कैद में हैं।
7. शरीफेह मोहम्मदी – मोहम्मदी ईरान की सामाजिक कार्यकर्ता हैं जिन्हें देशद्रोह के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। 22 वर्षीय ईरानी छात्रा महसा अमीनी की मौत के बाद ईरान में सितंबर 2022 से देशव्यापी आंदोलन शुरू हुए थे। हिजाब विरोधी आंदोलनों में मोहम्मदी काफी सक्रिय थीं जिस कारण दिसंबर 2023 में उन्हें गिरफ्तार किया गया।
8. हुसैन रोनागी – रोनागी ईरान के ब्लॉगर, इंटरनेट की आजादी के हिमायती और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। इन्हें कई बार जेल भेजा जा चुका है। ईरानी शासन की आलोचना के लिए पहली बार 13 दिसंबर 2009 को इन्हें जेल भेजा गया था। 15 साल की सजा हुई लेकिन 2019 में रिहा किया गया।
ट्रंप का संदेश: ‘हम भूले नहीं हैं’
ट्रंप प्रशासन ने अपने फारसी ट्वीट में साफ कहा है कि दुनिया भले ही वर्तमान विरोध प्रदर्शनों को देख रही हो, लेकिन अमेरिका उन पुराने नायकों को नहीं भूला है जिन्हें इन आंदोलनों से पहले ही सलाखों के पीछे डाल दिया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह मांग केवल कूटनीति नहीं, बल्कि ईरान पर सीधा दबाव बनाने की रणनीति है। अगर ये 8 कैदी रिहा नहीं होते, तो क्या अमेरिका वाकई सैन्य विकल्प का बटन दबा देगा? यह सवाल अब पूरी दुनिया को डरा रहा है।
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