Kolkata: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मचे आंतरिक संकट और नेताओं के पाला बदलने के सिलसिले के बीच एक नया सियासी ड्रामा शुरू हो गया है। टीएमसी से विधायकों, लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के लगातार हो रहे इस्तीफों की पृष्ठभूमि में अब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर आमने-सामने आ गए हैं। कीर्ति आजाद द्वारा तृणमूल में जारी इस भगदड़ के पीछे बीजेपी का हाथ होने का दावा करने के बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है।

ममता बनर्जी की पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर पश्चिम बंगाल में ‘ऑपरेशन लोटस’ (Operation Lotus) चलाया जा रहा है। आजाद ने इस कथित ऑपरेशन में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के सीधे शामिल होने की बात कही। उन्होंने विशेष रूप से आरोप लगाया कि हाल ही में राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले टीएमसी नेता प्रकाश बारिक ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से प्रेस कॉन्फ्रेंस (प्रेसवार्ता) की थी। आजाद ने कहा कि विपक्षी नेताओं पर केंद्रीय सुरक्षा और एजेंसियों के जरिए दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन वे बीजेपी के इन हथकंडों के आगे घुटने नहीं टेकेंगे।

‘मेरे घर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस उनका अधिकार’ — निशिकांत दुबे

टीएमसी सांसद के इन सीधे आरोपों पर बीजेपी के फायरब्रांड सांसद निशिकांत दुबे ने बेहद सधे और तंजिया अंदाज में पलटवार किया। दुबे ने कीर्ति आजाद को याद दिलाया कि वे दोनों संसद में लगभग 10 साल तक एक साथ बीजेपी के सांसद रह चुके हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा कि कीर्ति आजाद का उनके घर पर प्रेसवार्ता करने का पूरा अधिकार और कर्तव्य दोनों है। तंज कसते हुए दुबे ने आगे लिखा, “मेरा यह सरकारी आवास गोड्डा (झारखंड) की जनता की ही देन है।”

मतभेद को मनभेद में न बदलें: कीर्ति आजाद

निशिकांत दुबे के इस पलटवार के बाद कीर्ति आजाद ने थोड़ा नरम रुख अपनाते हुए दुबे को अपना आशीर्वाद दिया और कहा कि यह कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। उन्होंने सलाह देते हुए लिखा कि राजनीतिक मतभेद को कभी मनभेद में नहीं बदलना चाहिए। हालांकि, इसके तुरंत बाद उन्होंने अपने राजनीतिक दावों को फिर दोहराया और कहा कि वे केवल पश्चिम बंगाल में चल रहे ‘ऑपरेशन लोटस’ की पुष्टि कर रहे थे। आजाद ने यह भी सनसनीखेज दावा किया कि इस टूट के बीच उनके पास खुद कई बीजेपी सांसदों और संगठन के बड़े नेताओं के फोन आए हैं। उन्होंने आगामी संसद सत्र में मिलने की बात कहते हुए अपनी बातचीत खत्म की। यह पूरी जुबानी जंग ऐसे समय में सामने आई है जब टीएमसी अपने सांगठनिक ढांचे को बचाने के सबसे गंभीर संकट से गुजर रही है।

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