चतरा : चतरा में एक ऐसा गांव है जहां नहीं रहते हैं एक भी मर्द। इस पुरूष विहीन गांव का नाम है राजा केंदुआ। जो इटखोरी प्रखंड में पड़ता है। यह गांव मर्द विहीन कैसे हुआ, इसकी भी कहानी अजीबो गरीब है। दरअसल में
ईस गांव में करीब दो वर्ष पूर्व दो परिवारों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस घटना में कुछ लोगों की मौत भी हुई थी। दोनों पक्ष ने इटखोरी थाने में मामला दर्ज कराया। फिर क्या था इटखोरी पुलिस ने एक एक कर दोनों पक्ष से करीब दो दर्जन लोगों को उठाकर जेल भेज दिया। जहां उन्हें सजा हो गई। यही कारण है कि इस गांव में एक भी पुरूष नहीं बचे। गांव में सिर्फ महिलाएं और बच्चे हैं। महिलाएं खुद और बच्चों का पेट पालने के लिए पत्तों को अपनी जिंदगी का सहारा बनाया है। ये प्रति दिन जंगल जाती हैं, सखुआ का पता तोड़कर लाती हैं। उससे दोना और पत्तल बनाकर बेचती हैं। इससे जो कुछ राशि मिलती है उसी से इनका गुजर बसर चल रहा है। इनके समक्ष आवास की भी समस्या है। ये झुग्गी झोपड़ी में अपने छोटे छोटे बच्चों के साथ दिन गुजार रही हैं। इन्ही बेबश और लाचार परिवार के बीच में इटखोरी की जिला परिषद सदस्य सरिता देवी ने कंबल का वितरण किया। ताकि इन दिनों पड़ रहे कड़ाके की ठंड से उन्हें राहत मिल बल्कि इस ठंड से उनकी जान भी बच सके। वहीं जिला परिषद सदस्य ने इन परिवारों के बीच चावल भी वितरण किया। उन्होंने अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रशासन से आग्रह भी किया है कि वे इन परिवारों के पुनर्वास और बच्चों की शिक्षा के लिए मजबूत और प्रभावी कदम उठाएं।



