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रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू हुई। इस दौरान ईचागढ़ की विधायक सबिता महतो और डुमरी विधायक जयराम महतो ने विस्थापन और सिंचाई परियोजनाओं की विसंगतियों को लेकर सरकार से कड़े सवाल पूछे। ईचागढ़ विधायक सबिता महतो ने चांडिल डैम से प्रभावित विस्थापितों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दशकों बाद भी उनका पूर्ण पुनर्वास नहीं हो सका है। उन्होंने नाराजगी जताई कि पिछले दो वर्षों से इस संबंध में कोई उच्चस्तरीय बैठक तक नहीं हुई है।
जवाब में जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन ने बताया कि विस्थापितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया जारी है और 13 चिन्हित क्षेत्रों में भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, विधायक ने टोकते हुए कहा कि अभी भी 116 गांवों के विस्थापित अपने हक का इंतजार कर रहे हैं। मंत्री ने आश्वासन दिया कि नियमानुसार सभी विस्थापितों को भुगतान जल्द सुनिश्चित किया जाएगा।
जयराम महतो का तीखा प्रहार: ‘कंपनियों को पानी, किसानों को परेशानी क्यों?’
डुमरी विधायक जयराम महतो ने सिंचाई व्यवस्था पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार 4 लाख एकड़ जमीन की सिंचाई का दावा कर रही है, तो वह एक ऐसे गांव का नाम बताए जहां डैम के पानी से खेतों की सिंचाई हो रही है।
महतो ने बेहद चुभता हुआ सवाल उठाया कि “डैम किसानों की जमीन पर बनता है, लेकिन उसका पानी कंपनियों को आसानी से मिल जाता है, जबकि किसानों को सिंचाई और पुनर्वास के लिए संघर्ष करना पड़ता है।” उन्होंने इसे किसानों के साथ भेदभाव करार दिया। मंत्री हफीजुल हसन ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार अब ‘अंडरग्राउंड पाइपलाइन’ सिस्टम पर काम कर रही है और 2030 तक 4 लाख हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य है।
राशन वितरण और बाजार समितियों की बदहाली
सदन में खाद्य आपूर्ति का मुद्दा उठाते हुए हेमलाल मुर्मू ने कहा कि सुदूर क्षेत्रों में इंटरनेट न होने से बायोमेट्रिक सिस्टम से राशन नहीं मिल रहा है। मंत्री इरफान अंसारी ने बताया कि सरकार ने पुरानी 2G मशीनों को 4G मशीनों से बदल दिया है ताकि कनेक्टिविटी की समस्या दूर हो सके।
वहीं, विधायक सरयू राय ने बाजार समितियों की खस्ता हालत का मामला उठाया। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि बाजार समितियों को पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए नई नियमावली जल्द तैयार की जाएगी।

