रांची: झारखंड के स्वास्थ्य महकमे में अब कामचोरी और डेटा में हेराफेरी के दिन लदने वाले हैं। राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने अपने मानव संसाधन प्रबंधन को पूरी तरह से हाई-टेक बनाने का फैसला लिया है। सोमवार को नेपाल हाउस में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने मानव संसाधन सूचना प्रणाली (HRIS) को लागू करने के लिए हरी झंडी दे दी है।
1 अगस्त से पायलट प्रोजेक्ट का आगाज
इस नई व्यवस्था को सबसे पहले आउटसोर्सिंग और संविदा पर कार्यरत कर्मियों के लिए 1 अगस्त 2026 से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा। बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सॉफ्टवेयर का विकास कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरा किया जाए। इस प्रणाली का उद्देश्य नियुक्ति से लेकर सेवानिवृत्ति तक की पूरी प्रक्रिया को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है।
आधार आधारित बायोमेट्रिक से ही निकलेगी सैलरी
इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब कर्मियों का वेतन सीधे तौर पर आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़ जाएगा। यानी, जब तक कर्मचारी की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं होगी, तब तक वेतन का भुगतान संभव नहीं होगा। इससे न केवल कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित होगी, बल्कि विभाग में पारदर्शिता और सुरक्षा का नया मानक भी स्थापित होगा।
डेटा की ‘खिचड़ी’ होगी खत्म
वर्तमान में विभाग के पास डेटा अलग-अलग जिलों में असंगठित रूप में पड़ा है, जिससे महत्वपूर्ण निर्णय लेने में देरी होती है। HRIS के आने से भर्ती, छुट्टी, सैलरी, परफॉर्मेंस और ट्रांसफर-पोस्टिंग जैसे काम चुटकियों में होंगे। कर्मचारियों को अपना रिकॉर्ड देखने और अपडेट करने के लिए एक ‘सेल्फ-सर्विस पोर्टल’ भी मिलेगा। इससे न केवल मैन्युअल कागजी काम कम होगा, बल्कि वेतन संबंधी त्रुटियां और डेटा डुप्लीकेशन की समस्या भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
बैठक में अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज और 104 HIHL के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रितेश गुप्ता सहित कई तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस डिजिटल पहल से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की प्रशासनिक दक्षता में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।



