Lohardaga news: झारखंड आंदोलनकारी महासभा, लोहरदगा जिला समिति की बैठक बुधवार को जिलाध्यक्ष अनिल कुमार भगत की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में संगठन के केंद्रीय प्रधान महासचिव कयूम खान, केंद्रीय उपाध्यक्ष नीरू शांति भगत, जिला संयोजक प्रो. विनोद भगत सहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी उपस्थित रहे।

बैठक में झारखंड आंदोलनकारियों के सम्मान, पहचान, नियोजन, पेंशन और अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई तथा सरकार से शीघ्र ठोस निर्णय लेने की मांग की गई। बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय प्रधान महासचिव कयूम खान ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार को अविलंब वार्ता करनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि आंदोलनकारियों के लिए बनाई गई नियमावली में संशोधन कर जेल जाने की बाध्यता समाप्त की जाए तथा सभी आंदोलनकारियों को पहचान पत्र निर्गत किया जाए।

उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को सम्मानजनक तरीके से समान रूप से सम्मान, नियोजन और अन्य सुविधाओं का लाभ दिया जाना चाहिए। साथ ही आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन मॉडल को लागू कर आंदोलनकारियों के सपनों को साकार करने की दिशा में पहल की जानी चाहिए। केंद्रीय उपाध्यक्ष नीरू शांति भगत ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड आंदोलन केवल राज्य निर्माण का संघर्ष नहीं था, बल्कि यह जल, जंगल, जमीन, भाषा, संस्कृति और झारखंडी अस्मिता की रक्षा का आंदोलन था। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद भी आंदोलनकारियों की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य नहीं हो सका है।

सरकार को आंदोलनकारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन में महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसलिए महिला आंदोलनकारियों को भी समान रूप से पहचान, सम्मान और सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।उन्होंने संगठन के सदस्यों से एकजुट रहकर आंदोलनकारियों के अधिकारों की लड़ाई को मजबूती देने का आह्वान किया। जिलाध्यक्ष अनिल कुमार भगत ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्व आंदोलनकारियों को गुमराह कर उनका आर्थिक दोहन करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे सावधान रहने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य निर्माण के मूल उद्देश्यों को पूरा करने और राज्य के अमर पुरोधाओं के सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष को और तेज करना होगा। जिला संयोजक प्रो. विनोद भगत ने कहा कि झारखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के बावजूद आंदोलनकारियों को न तो अपेक्षित पहचान मिली और न ही सम्मान। उन्होंने कहा कि आज भी आंदोलनकारी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार झारखंड आंदोलन की ही उपज है, इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि आंदोलनकारियों के हित में शीघ्र निर्णय लेकर उनकी समस्याओं का समाधान करे। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आंदोलनकारियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए बिना किसी भेदभाव और बिना जेल जाने की शर्त के सभी आंदोलनकारियों को सम्मान, पहचान, नियोजन और पेंशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।बैठक में जिला कार्यकारी अध्यक्ष अमर किंडो, जिला उपाध्यक्ष उषा रानी लकड़ा, सचिव विशेषण भगत, तारामनी मिंज, सुशीला लकड़ा, छोटन विश्वकर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने भी आंदोलनकारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। बैठक का संचालन जिला कोषाध्यक्ष कृष्णा कुमार ठाकुर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कार्यकारी अध्यक्ष अमर किंडो ने किया।

बैठक में ललिता भगत, अनुभा टोप्पो, चैतू मुंडा, मनमोहन उरांव, विफई पाहन, लौलेन तिर्की, नौरी उरांव, सूरज मोहन लकड़ा, जगदीश उरांव समेत बड़ी संख्या में आंदोलनकारी उपस्थित थे। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि झारखंड आंदोलनकारियों के मुद्दों को लेकर संगठन की अगली जिला स्तरीय बैठक 29 जुलाई को आयोजित की जाएगी।

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