Ranchi: झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने टाटा पावर कंपनी लिमिटेड से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सार्वजनिक नोटिस जारी किए जाने के बाद भी आम उपभोक्ताओं या हितधारकों के उपस्थित न होने पर आयोग ने सुनवाई को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए स्वतंत्र अधिवक्ता श्वेता रानी को ‘एमिकस क्यूरी’ (न्याय मित्र) नियुक्त किया है। अब वह आयोग के समक्ष उपभोक्ताओं का पक्ष रखेंगी। इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को तय की गई है।
टाटा पावर खुद वहन करेगी एमिकस क्यूरी की कानूनी फीस
आयोग के आदेश के अनुसार, नियुक्त न्याय मित्र श्वेता रानी को अदालत में प्रत्येक पेशी के लिए 5,000 रुपये कानूनी शुल्क दिया जाएगा। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता टाटा पावर कंपनी ने स्वेच्छा से यह घोषणा की कि एमिकस क्यूरी के इस कानूनी शुल्क का पूरा खर्च कंपनी स्वयं वहन करेगी। आयोग ने इसे रिकॉर्ड पर लेते हुए श्वेता रानी को केस से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं ताकि वह आगामी तारीख पर अपना पक्ष मजबूती से रख सकें।
प्लांट की सुरक्षा और लाइफ असेसमेंट पर मांगा पूरक शपथ पत्र
बहस के दौरान आयोग के कड़े रुख को देखते हुए टाटा पावर के अधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि कंपनी जल्द ही एक अतिरिक्त पूरक शपथ पत्र दाखिल करेगी। इस हलफनामे में केवल बॉयलर, टर्बाइन और जनरेटर ही नहीं, बल्कि पूरे प्लांट के ‘अवशिष्ट जीवन मूल्यांकन’ (Residual Life Assessment) को पूरा करने की स्पष्ट समय-सीमा पेश की जाएगी। आयोग ने तकनीकी और ढांचागत सुरक्षा के हर पहलू की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
फैक्ट्री इंस्पेक्टर की रिपोर्ट और मजदूरों की सुरक्षा पर देना होगा ब्योरा
कंपनी को सौंपे जाने वाले शपथ पत्र में प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे ठोस कदमों का विवरण भी शामिल करना होगा। इसके साथ ही फैक्ट्री इंस्पेक्टर की आधिकारिक जांच रिपोर्ट को भी रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया गया है। एमिकस क्यूरी श्वेता रानी ने अदालत को बताया कि वह पूरे मामले का तकनीकी और कानूनी अध्ययन कर 29 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में अपनी दलीलें रखेंगी।



