Lohardaga news: सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल-जल’ योजना का दावा सलगी पंचायत के आनंदपुर गांव में पूरी तरह धराशायी नजर आ रहा है। विडंबना यह है कि जिस योजना का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, उसी योजना के लाभुक पिछले दस महीनों से पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। गांव में स्थापित दो जलमीनारें बंद पड़ी हैं, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों, पंचायत सचिव, ठेकेदार और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण आज तक इन्हें चालू नहीं कराया जा सका।ग्रामीणों का आरोप है कि जलमीनारों के बंद होने की शिकायत कई बार पंचायत स्तर से लेकर विभागीय अधिकारियों तक पहुंचाई गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। कोई जिम्मेदार अधिकारी गांव पहुंचकर समस्या की वास्तविक स्थिति जानने तक नहीं आया। इससे साफ है कि जनता की परेशानी से ज्यादा चिंता कागजी रिपोर्टों और फाइलों को चमकाने की है। आनंदपुर के महावीर मंदिर क्षेत्र सहित कई मोहल्लों में पेयजल संकट चरम पर है। कई चापानल भी खराब पड़े हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे प्रतिदिन दूर-दराज के जलस्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों के सामने खेतों और असुरक्षित जलस्रोतों का पानी उपयोग करने की नौबत आ गई है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
ग्रामीण मनोहर ठाकुर ने कहा कि जब गांव में जलमीनार, पाइपलाइन और नल-जल योजना मौजूद है तो फिर लोगों को पानी के लिए क्यों भटकना पड़ रहा है? आखिर किसकी लापरवाही का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं? उन्होंने कहा कि योजना पर लाखों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी निभाने वाला कोई नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जनता की बुनियादी समस्याओं पर उनकी चुप्पी समझ से परे है। वहीं विभागीय अधिकारी भी जिम्मेदारी तय करने के बजाय एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में लगे हैं। इसका खामियाजा गांव के गरीब और आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। जवाहर साहू, परमेश्वर साहू, मनोज साहू, राजू साहू, जोगेंद्र राम, विशाल कुमार, सुषमा देवी, राधिका देवी, मालती देवी, सरिता देवी, मीना देवी समेत अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जलमीनारों को तत्काल चालू कराया जाए तथा लापरवाही बरतने वाले पंचायत प्रतिनिधियों, संबंधित ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर दोनों जलमीनारों को चालू कर नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो आनंदपुर के लोग जिला मुख्यालय पहुंचकर धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।




