रांची: झारखंड की राजनीति और न्यायिक गलियारों में इन दिनों बड़गाईं अंचल की 8.46 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लाउंड्रिंग मामले ने हलचल मचा रखी है। शनिवार को रांची की विशेष PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लाउंड्रिंग एक्ट) अदालत में इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई हुई, जिसमें सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ‘डिस्चार्ज याचिका’ पर चर्चा की गई।
सुनवाई का घटनाक्रम और कानूनी दलीलें
सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन का पक्ष रखने के लिए उच्चतम न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा उपस्थित हुईं। उन्होंने अदालत के समक्ष सोरेन को निर्दोष बताते हुए दलीलें पेश कीं। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से जोहेब हुसैन ने अपना पक्ष रखा। फिलहाल अदालत ने दोनों पक्षों की आंशिक दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई के लिए 11 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल में अवैध रूप से जमीन पर कब्जा करने और उससे जुड़े धनशोधन से संबंधित है। ED का आरोप है कि इस घोटाले में सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई। इस मामले में हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर को खुद को निर्दोष बताते हुए डिस्चार्ज याचिका दाखिल की थी। सोरेन का तर्क है कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं और उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
18 आरोपियों पर लटकी तलवार
गौरतलब है कि ED ने इस मामले में हेमंत सोरेन समेत कुल 18 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। अदालत पहले ही इस चार्जशीट पर संज्ञान ले चुकी है और सभी आरोपियों को पुलिस पेपर सौंप दिए गए हैं। अब अगली न्यायिक प्रक्रिया के तहत सभी आरोपियों पर ‘आरोप तय’ (Frame of Charges) किए जाने हैं। यदि अदालत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका को खारिज करती है, तो उन पर औपचारिक रूप से मुकदमा शुरू हो जाएगा।
जेल में बंद हैं मुख्य किरदार
इस घोटाले के तार राजस्व जगत से गहरे जुड़े हैं। वर्तमान में, राजस्व निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद और अफसर अली जैसे मुख्य आरोपी सलाखों के पीछे हैं। जहां एक ओर हेमंत सोरेन अपनी बेगुनाही साबित करने की कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ED अपनी चार्जशीट के आधार पर मामले को अंतिम अंजाम तक ले जाने की कोशिश में है। अब सबकी नजरें 11 फरवरी पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि इस ‘जमीन के खेल’ में हेमंत सोरेन को राहत मिलती है या उनकी मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं।



