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सुशीला कार्की बनीं नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री, लिया बड़ा फैसला

World News: बांग्लादेश में हसीना सरकार का तख्ता पलट के बाद मोहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के मुखिया बने हुए हैं। एक हो गया है वहां चुनाव नहीं करा पाए हैं। वहीं नेपाल में अंतरिम सरकार की कमान संभालते ही प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने अगले साल

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World News: बांग्लादेश में हसीना सरकार का तख्ता पलट के बाद मोहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के मुखिया बने हुए हैं। एक हो गया है वहां चुनाव नहीं करा पाए हैं। वहीं नेपाल में अंतरिम सरकार की कमान संभालते ही प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने अगले साल 21 मार्च को संसद के चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है।

अगले साल 21 मार्च को होंगा संसदीय चुनाव

नेपाल की राजनीति में शुक्रवार की रात इतिहास रच दिया गया। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने नवनियुक्त प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सिफारिश पर प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया और 21 मार्च 2026 को नए संसदीय चुनाव की तारीख तय कर दी। यह बेहद महत्वपूर्ण फैसला है। यह दिखाता है कि पीएम कार्की सत्ता में जबरन नहीं बैठे रहना चाहतीं, जैसा कि बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं। पिछले एक साल से मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश के वरिष्ठ सलाहकार बनकर बैठे हैं और अभी भी चुनाव की कोई सटीक तारीख नहीं दी है।

उनके समर्थन वाले दल भी अब चुनाव की मांग को लेकर नाराज दिख रहे हैं। शुक्रवार को काठमांडू के शीतल निवास में हुए शपथ ग्रहण समारोह में 73 वर्षीय पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की ने नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली। वह अंतरिम सरकार का नेतृत्व करेंगी और छह महीने के भीतर चुनाव कराने की जिम्मेदारी संभालेंगी। यह बदलाव ऐसे समय आया जब भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन को लेकर देशभर में गुस्से की लहर थी।

खासकर युवाओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया, जिसके दबाव में मंगलवार को के पी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा। कार्की के शपथ लेते ही काठमांडू की सड़कों पर जेन जेड (1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी) ने जश्न मनाया। राष्ट्रपति कार्यालय के बाहर जुटे हजारों युवाओं ने पटाखे फोड़े और नारे लगाए। समारोह में नेपाल के प्रधान न्यायाधीश, शीर्ष अधिकारी, सुरक्षा प्रमुख और कई राजनयिक मौजूद थे। पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराई भी समारोह में पहुंचे, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि वह अकेले पूर्व प्रधानमंत्री थे जिन्होंने इस मौके पर शिरकत की। नेपाल में इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के साथ अनिश्चितता की लंबी खींचतान पर फिलहाल विराम लग गया है। अब पूरी निगाहें इस बात पर हैं कि कार्की की अंतरिम सरकार चुनाव तक देश को कितनी स्थिरता दे पाती है।

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