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Bokaro: झारखंड अलग राज्य की मांग को लेकर वर्ष 1992 में आर्थिक नाकेबंदी आंदोलन के दौरान शहीद हुए सुदन महतो का 34वां शहादत दिवस शनिवार को सिजुआ (दामोदा) स्थित शिवा महतो हाई स्कूल प्रांगण में उनकी समाधि स्थल पर श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने सबसे पहले शहीद सुदन महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही उन्होंने शहीद की स्मृति में आयोजित सप्ताह व्यापी सुदन महतो मेला का उद्घाटन भी किया।
इस मौके पर सांसद ने शहीद सुदन महतो के परिवार के सदस्यों, जिनमें उनकी मां, पत्नी, बेटा, बेटी और बहन शामिल थीं, को अंगवस्त्र और उपहार देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्मारक समिति के अध्यक्ष कार्तिक महतो ने की, जबकि संचालन सचिव राज कुमार महतो ने किया।
सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि सुदन महतो का संघर्ष और बलिदान हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड राज्य बने वर्षों बीत जाने के बावजूद असली आंदोलनकारियों को अब तक उचित पहचान नहीं मिल पाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन के वीर शहीदों के सपनों को पूरा करने और उनके अरमानों को मंजिल तक पहुंचाने का काम अब तक नहीं हो सका है, जो चिंता का विषय है।
कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के कई नेताओं ने भी शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इनमें जयनारायण महतो, सुभाष चंद्र महतो, नवीन महतो, रौशन महतो, बिगन महतो, अरविंद पांडेय, दीपक महतो, कमलेश महतो, मिथिलेश महतो, महेंद्र चौधरी, मनोज दास, गोविंद राम रजक, काली महतो और प्रीतम महतो शामिल रहे।
इस दौरान स्कूली छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। देशभक्ति गीत, शहीदों को समर्पित प्रस्तुतियां और 1932 खतियान आधारित गीत-नृत्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में कोषाध्यक्ष सह सांसद प्रतिनिधि एतवारी महतो ने धन्यवाद ज्ञापन किया। यह आयोजन शहीदों के बलिदान को याद करने और उनके सपनों को साकार करने के संकल्प के रूप में देखा गया।

