रांची: राजधानी के कांके थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। एक आदिवासी महिला, सुभाषो देवी ने पुलिस पर भू-माफियाओं के साथ साठगांठ करने और नियमों के विरुद्ध जाकर उन्हें प्रताड़ित करने का संगीन आरोप लगाया है। यह मामला न केवल पुलिसिया मनमानी को दर्शाता है, बल्कि आदिवासियों की जमीन पर हो रहे अवैध कब्जों की कड़वी सच्चाई भी उजागर करता है।

क्या है पूरा विवाद?
पीड़िता सुभाषो देवी के अनुसार, मौजा हुसीर में उनकी पैतृक जमीन है, जिसका खतियान और पंजी-II में पुख्ता रिकॉर्ड दर्ज है। लेकिन भू-माफिया फर्जी कागजात के दम पर इस बेशकीमती जमीन को हड़पना चाहते हैं। सुभाषो देवी का आरोप है कि जब उन्होंने इसकी शिकायत अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी से की, तो न्याय मिलने के बजाय उन्हें कानूनी पेचीदगियों में उलझा दिया गया।

कानून की मियाद खत्म, फिर भी पुलिसिया दखल
मामले में धारा 163 BNSS (पूर्व में धारा 144) के तहत अनुमंडल दंडाधिकारी के न्यायालय में केस (M-3532/2025) चला था, जिसकी अवधि 22 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुकी है। नियमानुसार, आदेश की अवधि खत्म होने के बाद जमीन पर किसी भी तरह की रोक नहीं रह जाती। पीड़िता का कहना है कि जब वे 26 जनवरी को अपनी जमीन पर काम करा रही थीं, तब भू-माफियाओं ने उन पर हमला किया और जातिसूचक गालियां दीं। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी वैध अदालती आदेश के, कांके पुलिस मौके पर पहुंची और सुभाषो देवी का काम रुकवा दिया।

एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप
सुभाषो देवी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी शिकायत पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के बजाय, पुलिस ने दूसरे पक्ष के प्रभाव में आकर उनके ही लोगों पर ‘कांके थाना कांड संख्या 23/2026’ के तहत मामला दर्ज कर दिया। न्याय की उम्मीद में पीड़िता ने अब डीजीपी, आईजी, डीआईजी और एसएसपी का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि भू-माफियाओं को संरक्षण देने वाले थानेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उनकी पैतृक संपत्ति की रक्षा की जाए। यह मामला अब रांची के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर किसकी शह पर पुलिस नियम विरुद्ध जाकर एक पक्षीय कार्रवाई कर रही है।

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