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‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ लागू करने की पुरजोर मांग, बीमा योजना-सुरक्षा पर सरकार को घेरा

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शनिवार को पत्रकारों के हितों और उनकी सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठा। कोडरमा की विधायक और प्रदेश की पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. नीरा यादव ने शून्यकाल के दौरान राज्य के पत्रकारों की समस्याओं को सदन के

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रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शनिवार को पत्रकारों के हितों और उनकी सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठा। कोडरमा की विधायक और प्रदेश की पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. नीरा यादव ने शून्यकाल के दौरान राज्य के पत्रकारों की समस्याओं को सदन के पटल पर रखा। उन्होंने सरकार से मांग की कि पत्रकारों के लिए लंबित स्वास्थ्य बीमा योजना को तत्काल प्रभावी बनाया जाए और अन्य राज्यों की तर्ज पर झारखंड में भी ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ लागू किया जाए।

जोखिम में काम, पर सुविधाओं का अभाव

सदन को संबोधित करते हुए डॉ. नीरा यादव ने कहा कि पत्रकार समाज का आईना होते हैं और वे अत्यंत कठिन व जोखिम भरी परिस्थितियों में समाचारों का संकलन करते हैं। चाहे भीषण गर्मी हो, बरसात हो या कोई हिंसक विरोध प्रदर्शन, पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर जनता तक खबरें पहुँचाते हैं। इसके बावजूद, उन्हें वे बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल पा रही हैं, जिसके वे हकदार हैं।

बीमा योजना पर उठाए सवाल

विधायक ने स्वास्थ्य बीमा योजना में हो रही देरी पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने बताया कि राज्य में पत्रकार स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम पर पत्रकारों से प्रीमियम की राशि तो ली गई, लेकिन आज तक उन्हें इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल सका है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विसंगति को दूर कर बीमा योजना को अविलंब चालू किया जाए, ताकि पत्रकारों और उनके परिवारों को चिकित्सा सहायता मिल सके।

सुरक्षा कानून की मांग और आभार

डॉ. नीरा यादव ने इस बात पर जोर दिया कि देश के कई अन्य राज्यों में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं। झारखंड में भी पत्रकारों पर बढ़ते हमलों और दबाव को देखते हुए ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ की नितांत आवश्यकता है।

विधायक द्वारा सदन में पत्रकारों के प्रति दिखाई गई इस संवेदनशीलता का पत्रकार जगत ने व्यापक स्वागत किया है। विभिन्न पत्रकार संगठनों ने डॉ. नीरा यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सदन में इस तरह मजबूती से आवाज उठाना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूती प्रदान करता है। अब सभी की नजरें सरकार के जवाब और इस दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।

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