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MGM में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल, ठप हुई स्वास्थ्य सेवाएं

Jamshedpur news: डिमना स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल में सोमवार से जूनियर डॉक्टरों ने मानदेय (स्टाइपेंड) बढ़ाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। पिछले एक महीने से काला बिल्ला लगाकर विरोध जता रहे डॉक्टरों ने अब आंदोलन को तेज करते

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Jamshedpur news: डिमना स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल में सोमवार से जूनियर डॉक्टरों ने मानदेय (स्टाइपेंड) बढ़ाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। पिछले एक महीने से काला बिल्ला लगाकर विरोध जता रहे डॉक्टरों ने अब आंदोलन को तेज करते हुए कार्य बहिष्कार का रास्ता अपनाया है। हड़ताल के कारण ओपीडी समेत अधिकांश नियमित स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं, हालांकि आपातकालीन सेवाओं को आंशिक रूप से चालू रखा गया है।

जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले पांच वर्षों से लगातार स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। उनका आरोप है कि कई बार अधिकारियों द्वारा वेतन वृद्धि का भरोसा दिया गया, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि उनकी तुलना में अन्य राज्यों, खासकर बिहार के मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों को अधिक मानदेय दिया जा रहा है, जबकि यहां कार्यभार और जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि वे 24 घंटे मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं, इसके बावजूद सरकार उनकी समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है। जूनियर डॉक्टरों ने दावा किया है कि अस्पताल के कई सीनियर डॉक्टर और मेडिकल कॉलेज के अन्य स्टाफ भी उनके समर्थन में हैं।

इस हड़ताल का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। कोल्हान क्षेत्र के एकमात्र बड़े सरकारी मेडिकल संस्थान होने के कारण यहां हर दिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन ओपीडी बंद रहने और नियमित सेवाएं बाधित होने से दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ रहा है या मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ गई है।

हालांकि डॉक्टरों ने यह स्पष्ट किया है कि गंभीर मरीजों को देखते हुए इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की गई हैं, लेकिन वहां भी सीमित संसाधनों और कम स्टाफ के कारण दबाव की स्थिति बनी हुई है।

फिलहाल जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है और स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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