Ranchi : झारखंड के महानायक, पूर्व मुख्यमंत्री और “बाबाए झारखंड” कहलाए जाने वाले शिबू सोरेन की 82वीं जयंती के अवसर पर एक गरिमामय और यादगार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष मौके पर झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन के सम्मानित सदस्य तथा प्रसिद्ध शोधकर्ता एवं लेखक डॉ. जमाल अहमद ने झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र महतो को अपनी चर्चित एवं शोधपरक पुस्तक “बाबा-ए-झारखंड शिबू सोरेन दानिश्वरों की नजर में” भेंट की।

पुस्तक स्वीकार करते हुए विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र महतो ने डॉ. अहमद का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह पुस्तक केवल एक व्यक्तित्व का परिचय नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक यात्रा का प्रामाणिक दस्तावेज है। इसमें शिबू सोरेन के संघर्ष, जनसेवा और आदिवासी अधिकारों के लिए किए गए बलिदान को देश के नामी विद्वानों, शिक्षकों, डॉक्टरों और वरिष्ठ पत्रकारों ने अपने दृष्टिकोण से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नई पीढ़ी को बाबा-ए-झारखंड के विचारों और कार्यों से अवगत कराती है, जिससे जनआंदोलनों की असली भावना जीवित रहती है।

स्पीकर ने पुस्तक का अध्ययन करने के बाद अपने प्रशंसात्मक विचार साझा करते हुए कहा कि यह कृति शिबू सोरेन के बहुआयामी व्यक्तित्व को समझने के लिए अत्यंत मूल्यवान और गंभीर अकादमिक दस्तावेज है। उन्होंने पुस्तक में शामिल विभिन्न विचारधाराओं के प्रतिष्ठित लेखकों के लेखों की सराहना की और कहा कि इससे पुस्तक को वैचारिक व्यापकता और शोध की गहराई मिली है।

रविंद्र महतो ने यह सुझाव भी दिया कि इस पुस्तक का हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में शीघ्र अनुवाद होना चाहिए, ताकि पूरे देश के पाठक शिबू सोरेन के संघर्ष और योगदान से परिचित हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी अधिकारों की रक्षा, राज्य निर्माण और दीर्घकालीन जनसेवा को देखते हुए शिबू सोरेन को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्मानित किया जाना चाहिए।

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