फॉण्ट कनवर्टर NEW

कयामत की आहट! ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ में हलचल, 3 मीटर बढ़ेगा समुद्र स्तर

World News: अंटार्कटिका की जमी हुई खामोशी के बीच अब एक ऐसी खतरनाक हलचल सुनाई दे रही है, जो पूरी दुनिया के नक्शे को बदल सकती है। वैज्ञानिकों ने पहली बार ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ कहे जाने वाले थ्वाइट्स ग्लेशियर (Thwaites Glacier) के पास 360 से अधिक

अपनी भाषा में पढ़ें

World News: अंटार्कटिका की जमी हुई खामोशी के बीच अब एक ऐसी खतरनाक हलचल सुनाई दे रही है, जो पूरी दुनिया के नक्शे को बदल सकती है। वैज्ञानिकों ने पहली बार ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ कहे जाने वाले थ्वाइट्स ग्लेशियर (Thwaites Glacier) के पास 360 से अधिक रहस्यमयी भूकंपों का पता लगाया है। यह कंपन किसी टेक्टोनिक प्लेट के टकराने से नहीं, बल्कि बर्फ के भीतर हो रही भीषण उथल-पुथल का नतीजा है।

इन असामान्य झटकों को ‘ग्लेशियल अर्थक्वेक’ कहा जा रहा है। जब विशाल आइसबर्ग टूटकर समुद्र में गिरते हैं और अपनी ही मूल बर्फ से टकराते हैं, तो लो-फ्रीक्वेंसी ऊर्जा निकलती है जो जमीन को कंपा देती है।

तटीय शहरों पर मंडराया डूबने का खतरा, भारत भी अछूता नहीं

चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि जिन वर्षों में थ्वाइट्स ग्लेशियर के खिसकने की रफ्तार तेज रही, उन्हीं सालों में इन भूकंपों की संख्या भी सबसे अधिक पाई गई। वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र का बढ़ता तापमान और पिघलती बर्फ इस ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ को अंदर से खोखला कर रही है। यदि यह ग्लेशियर पूरी तरह ढह जाता है, तो समुद्र का जलस्तर करीब 3 मीटर तक बढ़ सकता है।

इसका असर केवल अंटार्कटिका तक सीमित नहीं रहेगा। न्यूयॉर्क, लंदन से लेकर भारत के मुंबई और कोलकाता जैसे तटीय शहरों पर स्थायी बाढ़ का खतरा मंडराने लगेगा। लाखों लोगों का विस्थापन और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट की आशंका जताई गई है। थ्वाइट्स की यह अस्थिरता संकेत है कि प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है और अब वक्त रहते संभलना जरूरी है।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram