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विरासत, एकता और शिक्षा से ही आगे बढ़ेगा समाज: सरयू राय

Jamshedpur: रविवार को जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने आदित्यपुर, सिदगोड़ा और सोनारी में आयोजित विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए समाज की मजबूती के मूल मंत्र पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की असली ताकत उसकी साझा

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Jamshedpur: रविवार को जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने आदित्यपुर, सिदगोड़ा और सोनारी में आयोजित विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए समाज की मजबूती के मूल मंत्र पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की असली ताकत उसकी साझा विरासत, आपसी एकता और आने वाली पीढ़ी की शिक्षा में छिपी होती है। इतिहास से कटकर कोई भी समाज आगे नहीं बढ़ सकता।

आदित्यपुर में झारखंड क्षत्रिय संघ के बैनर तले आयोजित परिवार मिलन समारोह में सरयू राय ने कहा कि क्षत्रिय समाज का इतिहास गौरवशाली और प्रेरणादायक रहा है। धर्म, समाज, देश और संस्कृति की रक्षा के लिए क्षत्रियों ने जो संघर्ष किया है, वह आज भी आत्मबल देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपने अतीत से जोड़ते हैं और वर्तमान व भविष्य की दिशा तय करने में मदद करते हैं। अपनी परंपरा, विरासत और इतिहास को याद रखना समाज को भीतर से मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि समय चाहे जैसा भी बदले, क्षत्रिय समाज की विरासत हमेशा गर्व का विषय रहेगी।

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सरयू राय ने कहा कि आज के दौर की प्रतिस्पर्धा की तुलना उस त्याग और पराक्रम से नहीं की जा सकती, जिसने इतिहास को आकार दिया। कई बार शासक वर्ग अपने लिए प्रचार के साधन जुटाता है, लेकिन इतिहास गवाह है कि कई समाजों ने अपने महापुरुषों के योगदान को खुद सहेजा और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया।

इसके बाद सिदगोड़ा टाउन हॉल में चंद्रवंशी एकता मंच द्वारा आयोजित वनभोज कार्यक्रम में सरयू राय ने चंद्रवंशी समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चंद्रवंशी समाज महाराज जरासंध को अपना प्रतीक पुरुष मानता है। जरासंध की वीरता और व्यक्तित्व को समझने के साथ-साथ पूरे उस कालखंड को साझा विरासत के रूप में देखने की जरूरत है। उन्होंने जरासंध, कंस, श्रीकृष्ण, कुंती और भीष्म पितामह से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी एक ही समय और परंपरा से जुड़े हुए हैं। अलग-अलग वंशों में बांटकर देखने के बजाय इन्हें साझा सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्वीकार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि साझा विरासत कमजोर हुई तो सनातन संस्कृति भी कमजोर पड़ेगी और हमारे महापुरुषों के आदर्श भुला दिए जाएंगे।

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सोनारी स्थित ट्राइबल कल्चर सेंटर में कानू समाज के वनभोज कार्यक्रम में सरयू राय ने शिक्षा को भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि कानू विकास संघ से उनका पुराना रिश्ता रहा है और यह समाज इसलिए आगे बढ़ रहा है क्योंकि यहां बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यक्रम में जिन बच्चों को सम्मानित किया गया, उन्होंने 95 प्रतिशत तक अंक हासिल किए हैं, जो समाज की सही दिशा का संकेत है। उन्होंने कहा कि जो समाज शिक्षा को अपनाएगा, वही अपने अधिकार और सम्मान को हासिल करेगा। शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है और जो पढ़ेगा, वही आगे बढ़ेगा।

तीनों कार्यक्रमों में सरयू राय ने सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और शिक्षा को समाज के समग्र विकास की बुनियाद बताते हुए लोगों से साझा विरासत को सहेजने और भावी पीढ़ी के निर्माण पर गंभीरता से सोचने का आह्वान किया।

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