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आयुर्वेद का अनमोल रत्न: पेट की हर समस्या का काल है ‘शंख भस्म’

Health: भारतीय चिकित्सा पद्धति यानी आयुर्वेद में भस्म चिकित्सा की एक अत्यंत समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है। इन्हीं भस्मों के बीच ‘शंख भस्म’ को एक विशिष्ट और चमत्कारी औषधि के रूप में देखा जाता है। आयुर्वेद के रसशास्त्र में शंख को शुद्ध वर्ग के

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Health: भारतीय चिकित्सा पद्धति यानी आयुर्वेद में भस्म चिकित्सा की एक अत्यंत समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है। इन्हीं भस्मों के बीच ‘शंख भस्म’ को एक विशिष्ट और चमत्कारी औषधि के रूप में देखा जाता है। आयुर्वेद के रसशास्त्र में शंख को शुद्ध वर्ग के खनिज के रूप में वर्णित किया गया है, जो न केवल पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है बल्कि शरीर की बुनियादी संरचना को भी मजबूती प्रदान करता है।

पाचन तंत्र के लिए रामबाण : आजकल की बदलती जीवनशैली में पेट की समस्याएं आम हो गई हैं। शंख भस्म में प्राकृतिक अम्लरोधी (Anti-acid) गुण होते हैं। यदि आप एसिड रिफ्लक्स, सीने में जलन, खट्टी डकार या पेट दर्द से परेशान हैं, तो शंख भस्म एक प्रभावी समाधान साबित हो सकती है। यह कमजोर पाचन अग्नि को संतुलित कर भोजन के पाचन को बेहतर बनाती है, जिससे गैस और सिरदर्द जैसी शिकायतों में हां की तरह सुधार देखने को मिलता है।

हड्डियों और दांतों का सुरक्षा कवच : शंख भस्म मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट से निर्मित होती है। यही कारण है कि यह हड्डियों और दांतों के स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा करने और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने में यह सहायक है। इसके नियमित और नियंत्रित उपयोग से जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है।

सेवन में बरतें ये सावधानी : आयुर्वेद विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि शंख भस्म का सेवन कभी भी सीधे नहीं करना चाहिए। इसका स्वाद तीखा होता है, इसलिए इसे हमेशा शहद, घी, दही या चिकित्सक द्वारा बताए गए अनुपान के साथ ही लेना चाहिए। गलत मात्रा या बिना परामर्श के इसका सेवन नुकसानदायक हो सकता है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं को इसके उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार, यह भस्म शरीर में वात और कफ दोष को संतुलित करने का कार्य करती है। इन दोषों के नियंत्रित रहने से न केवल पेट, बल्कि त्वचा और जोड़ों से जुड़ी बीमारियां भी दूर रहती हैं। यदि सही मार्गदर्शन में इसका उपयोग किया जाए, तो यह प्राचीन औषधि आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्रभावी समाधान बन सकती है।

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