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शाहेद-136 ड्रोन पर लट्टू हुआ अमेरिका, जानें वजह

World News: रूस-यूक्रेन युद्ध में तबाही मचाने वाले शाहेद-136 ड्रोन अब अमेरिका को भी आकर्षित कर रहे हैं। रूस इन ड्रोन का इस्तेमाल लगातार हमलों में कर रहा है और इन्हें ईरान से हासिल किया गया है। इनकी खासियत है कम लागत और लंबी दूरी

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World News: रूस-यूक्रेन युद्ध में तबाही मचाने वाले शाहेद-136 ड्रोन अब अमेरिका को भी आकर्षित कर रहे हैं। रूस इन ड्रोन का इस्तेमाल लगातार हमलों में कर रहा है और इन्हें ईरान से हासिल किया गया है। इनकी खासियत है कम लागत और लंबी दूरी तक वार करने की क्षमता। यही वजह है कि अमेरिका और उसके सहयोगी अब ऐसे ही ड्रोन बनाने की तैयारी में जुट गए हैं।

कम लागत में बड़ी तबाही

अमेरिका के पास फिलहाल लंबी दूरी की मिसाइलें तो हैं, लेकिन उनकी लागत बेहद ज्यादा है। दूसरी ओर, ईरान निर्मित शाहेद-136 ड्रोन बेहद कम खर्च में तैयार हो जाते हैं और एक साथ बड़ी संख्या में छोड़े जा सकते हैं। यही कारण है कि अमेरिका भी अब इन्हें मॉडल मानकर अपने हथियारों के बेड़े में शामिल करना चाहता है।

शाहेद-136 की ताकत

साल 2020 में पहली बार ईरान ने शाहेद-136 ड्रोन का इस्तेमाल किया था। यह ड्रोन हथियार की तरह काम करता है और लक्ष्य पर पहुंचने के बाद जोरदार विस्फोट करता है। इसकी रेंज 2,000 से 2,500 किलोमीटर तक होती है और यह करीब 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। आमतौर पर इसे बड़ी संख्या में लांच किया जाता है, जिससे दुश्मन पर स्वॉर्म अटैक किया जा सके। एक ड्रोन 40 से 50 किलो विस्फोटक लेकर चलता है, जो किसी इमारत या सैन्य अड्डे को ध्वस्त करने के लिए काफी होता है।

स्वॉर्म अटैक की रणनीति

ईरान इन ड्रोन का इस्तेमाल कई जगहों पर एक साथ हमला करने के लिए करता है। यह प्रोपेलर से चलता है और 3,000 से 4,000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। रूस ने यूक्रेन में इसका व्यापक इस्तेमाल किया है, जिसने अमेरिका और बाकी देशों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भविष्य के युद्धों में ऐसे ड्रोन कितने अहम साबित हो सकते हैं।

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