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सेहल गांव: मिलकर किए गए प्रयासों से बदली तस्वीर, बना जलवायु-स्मार्ट विकास का उदाहरण

गुमला:घाघरा प्रखंड की सेहल पंचायत अंतर्गत स्थित सेहल गांव आज यह साबित कर रहा है कि अगर सरकारी योजनाएं, सामाजिक संस्थाएं और किसान एक साझा उद्देश्य के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण विकास केवल कागजों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों की ज़िंदगी में

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गुमला:घाघरा प्रखंड की सेहल पंचायत अंतर्गत स्थित सेहल गांव आज यह साबित कर रहा है कि अगर सरकारी योजनाएं, सामाजिक संस्थाएं और किसान एक साझा उद्देश्य के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण विकास केवल कागजों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों की ज़िंदगी में साफ-साफ दिखाई देता है। कभी सीमित संसाधनों, अनियमित खेती और आजीविका की अनिश्चितता से जूझने वाला यह गांव आज जलवायु-स्मार्ट विकास, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई और बढ़ती किसान आमदनी का एक प्रेरणादायी उदाहरण बन चुका है।

सेहल गांव में यह बदलाव एक दिन में नहीं आया। इसके पीछे मनरेगा (MGNREGA), कृषि एवं उद्यान विभाग, सामाजिक संस्था प्रदान (PRADAN) और घाघरा महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड (GWFPCL) के निरंतर और समन्वित प्रयास शामिल हैं। इन संस्थाओं ने मिलकर न केवल गांव की खेती व्यवस्था को मजबूत किया, बल्कि किसानों को भविष्य के लिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा भी दिखाई।

बागवानी से मिली स्थायी आजीविका की राह

गांव में आय के स्थायी स्रोत विकसित करने की दिशा में बागवानी को प्राथमिकता दी गई। मनरेगा योजना के तहत सेहल गांव में 5 एकड़ क्षेत्र में आम का बाग लगाया गया। इसके साथ ही सामाजिक संस्था प्रदान के सहयोग से अतिरिक्त 22 एकड़ भूमि में आम की बागवानी की गई। इससे न केवल हरियाली बढ़ी, बल्कि किसानों को दीर्घकालीन आय का भरोसेमंद साधन भी मिला।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले बारिश पर निर्भर खेती के कारण आमदनी अनिश्चित रहती थी, लेकिन बागवानी शुरू होने से अब आने वाले वर्षों में नियमित आय की उम्मीद जगी है। आम के बाग तैयार होने के बाद गांव के कई परिवारों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।

जल संरक्षण और सिंचाई ने बदली खेती की दिशा

सेहल गांव में खेती के लिए सबसे बड़ी चुनौती पानी की थी। इसे देखते हुए मनरेगा के तहत गांव में दो बड़े तालाबों का निर्माण कराया गया। इन तालाबों ने न केवल भूजल स्तर को बेहतर किया, बल्कि पशुपालन और घरेलू जरूरतों के लिए भी पानी की उपलब्धता बढ़ाई।

इसके साथ ही सोलर लिफ्ट सिंचाई योजना के माध्यम से 65 एकड़ कृषि भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस योजना से 52 किसान सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं। सौर ऊर्जा आधारित इस व्यवस्था ने किसानों को डीजल और बिजली पर निर्भरता से काफी हद तक मुक्त कर दिया है, जिससे खेती की लागत में भी कमी आई है।

क्लाइमेट-स्मार्ट विलेज के रूप में पहचान

सेहल गांव को योजनाबद्ध तरीके से “क्लाइमेट-स्मार्ट विलेज” के रूप में विकसित किया गया है। यहां 65 एकड़ खेती में सौर ऊर्जा से सिंचाई की जा रही है, वहीं 110 घरों तक बिजली पहुंचाई गई है। इससे न केवल कृषि कार्य आसान हुआ है, बल्कि ग्रामीणों का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है।

गांव में सौर ऊर्जा आधारित तेल निकालने की मशीन और पत्तल बनाने की मशीनें भी स्थापित की गई हैं। इन इकाइयों से महिलाओं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है। खास बात यह है कि अब ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए बाहर पलायन नहीं करना पड़ रहा है।

इन प्रयासों का असर यह है कि कई परिवारों की सालाना आमदनी ₹1 लाख से बढ़कर ₹1.5 लाख तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जो इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

विभागों के तालमेल से मजबूत हुई खेती

सेहल गांव की सफलता की सबसे बड़ी वजह विभिन्न सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय है। कृषि विभाग के सहयोग से गांव में 12 एकड़ में सरसों की खेती कराई गई, जिससे किसानों को नकदी फसल का विकल्प मिला। वहीं उद्यान विभाग के माध्यम से 5 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत की गई, जो क्षेत्र के लिए एक नई पहल मानी जा रही है।

घाघरा महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड (GWFPCL) द्वारा किसानों को उन्नत खेती, बेहतर बीज चयन और अधिक लाभकारी फसलों की जानकारी दी जा रही है। वर्तमान में गांव में 14 एकड़ में हरी मटर और 16 एकड़ में सरसों की खेती हो रही है। इससे 42 किसान लाभान्वित हो रहे हैं और प्रति किसान ₹40,000 से ₹50,000 तक की मौसमी आय होने की उम्मीद है।

किसानों में बढ़ा आत्मविश्वास

सेहल गांव के किसान अब खुद को केवल परंपरागत किसान नहीं, बल्कि उद्यमी के रूप में देखने लगे हैं। नई तकनीक, सौर ऊर्जा और बेहतर बाजार संपर्क ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है। किसानों का कहना है कि पहले वे मौसम और बाजार दोनों को लेकर असमंजस में रहते थे, लेकिन अब योजनाबद्ध खेती से जोखिम कम हुआ है और आमदनी स्थिर हुई है।

महिलाओं की भागीदारी भी इस बदलाव का अहम हिस्सा है। स्वयं सहायता समूहों और GWFPCL के माध्यम से महिलाएं खेती, प्रसंस्करण और लघु उद्योगों से जुड़ रही हैं, जिससे परिवार की आय में उनका योगदान बढ़ा है।

भविष्य की ओर बढ़ता सेहल गांव

सरकारी योजनाओं, प्रदान और GWFPCL के संयुक्त प्रयासों से सेहल गांव आज सतत, आत्मनिर्भर और जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह गांव अब सिर्फ एक पंचायत का हिस्सा नहीं, बल्कि गुमला जिले के लिए एक सीख और मॉडल बन चुका है।

सेहल गांव की कहानी यह संदेश देती है कि सही योजना, सामूहिक प्रयास और स्थानीय सहभागिता से ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसा विकास संभव है, जो पर्यावरण के अनुकूल हो, आजीविका को मजबूत करे और लोगों को भविष्य के प्रति आश्वस्त बनाए। आने वाले समय में यदि ऐसे मॉडल को अन्य गांवों में भी अपनाया जाए, तो ग्रामीण भारत की तस्वीर और भी बेहतर हो सकती है।

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Shiwam Keshri

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