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Sports News: गुजरात के आदिवासी जिले डांग से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपना लोहा मनवाने वाली सरिता गायकवाड़ ने कई चुनौतियों का सामना किया। बचपन में खो-खो खिलाड़ी रही सरिता ने साल 2010 में एथलेटिक्स अपनाया और 400 मीटर हर्डल व रिले में आगे बढ़ीं।
खेल महाकुंभ बना टर्निंग पॉइंट
राज्य स्तरीय ‘खेल महाकुंभ’ में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से एक जोड़ी स्पोर्ट्स जूते और 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार मिला। सरिता बताती हैं कि यह उनके करियर का अहम मोड़ था, जिसने जीवन को नई दिशा दी।
पेशेवर कोचिंग और नई ऊंचाइयां
सरिता को स्पोर्ट्स हॉस्टल में दाखिला मिला, जहां उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, मेडिकल सहायता और मार्गदर्शन मिला। 2011 में कोच के सुझाव पर उन्होंने 400 मीटर हर्डल और 400 मीटर रेस में विशेषता हासिल की।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता
2018 के एशियन गेम्स में सरिता ने 4×400 मीटर महिला रिले में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। इसी साल वह कॉमनवेल्थ गेम्स में भी चुनी गईं, और गुजरात से महिला रिले टीम में जगह बनाने वाली पहली खिलाड़ी बनीं।
पीएम मोदी का सम्मान और नियुक्ति
एशियन गेम्स पदक विजेताओं के सम्मान समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने सरिता को उनके शुरुआती दिनों से पहचानने की बात कही। उनकी सफलता के बाद गुजरात सरकार ने उन्हें 1 करोड़ रुपये का पुरस्कार और राज्य में नौकरी दी।
सरिता गायकवाड़ की कहानी न सिर्फ व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह उन अनगिनत आदिवासी लड़कियों की प्रेरणा है जिन्होंने शिक्षा और खेल के जरिए बाधाओं को पार करके मंज़िल हासिल की।

