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मुसलमानों के अधिकार 25 साल बाद भी अधूरे, 15 नवम्बर तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा उग्र आंदोलन : एस. अली

Dhanbad : तोपचांची प्रखंड के भुईयां चितरो गांव में रविवार को धनबाद मुस्लिम फ्रंट की ओर से एक महाबैठक आयोजित की गई। बैठक में मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य अतिथि के रूप में

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Dhanbad : तोपचांची प्रखंड के भुईयां चितरो गांव में रविवार को धनबाद मुस्लिम फ्रंट की ओर से एक महाबैठक आयोजित की गई। बैठक में मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य अतिथि के रूप में शामिल झारखंड छात्र संघ के अध्यक्ष एस. अली ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “झारखंड बने 25 साल बीत गए, लेकिन मुसलमानों के न्याय और अधिकार से जुड़े मुद्दे अब तक हल नहीं हुए हैं।”

उन्होंने कहा कि संयुक्त बिहार के समय मुसलमानों को जो अधिकार प्राप्त थे, वे झारखंड बनने के बाद धीरे-धीरे छीन लिए गए। झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा 2003 से 2023 तक दी गई आलिम-फाजिल डिग्री की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई मुस्लिम शिक्षित वर्ग के साथ नाइंसाफी है। साथ ही सहायक आचार्य बहाली में आलिम डिग्री धारकों का परिणाम रोकना और माध्यमिक आचार्य बहाली में फाजिल डिग्री वालों को शामिल न करना शिक्षा विभाग की मनमानी को दर्शाता है।

एस. अली ने कहा कि सरकार ने पहले भी उर्दू शिक्षा को कमजोर करने की कोशिश की है। 543 उर्दू स्कूलों का स्टेटस छीनकर सामान्य विद्यालय बना दिया गया, जबकि बिहार से मिले 4401 उर्दू सहायक शिक्षक पदों में से 3712 पदों को सरेंडर कर दिया गया।

उन्होंने राज्य में हुई 68 मॉब लिंचिंग घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सदन से पारित “भीड़ नियंत्रण रोकथाम बिल” अब तक लागू नहीं किया गया। मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना में भी अल्पसंख्यकों के लिए कोई अलग बजट प्रावधान नहीं है।

एस. अली ने कहा कि बांग्लाभाषी झारखंडी मुसलमानों का लगातार उत्पीड़न हो रहा है, वहीं भैंस वंशी पशुओं के वध की अनुमति नहीं दी जा रही। बुनकर एवं टेलरिंग समितियों को सरकारी काम नहीं मिल रहा और मुस्लिम धार्मिक स्थलों की भूमि का पट्टा भी सरकार द्वारा निर्गत नहीं किया जा रहा।

उन्होंने कहा कि झारखंड के निर्माण में मुसलमानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन आज उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। अगर 15 नवम्बर 2025 तक सरकार ने इन मुद्दों का समाधान नहीं किया, तो राज्यव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

बैठक की अध्यक्षता अजमूल अंसारी ने की और संचालन अजमत अंसारी ने किया। इस मौके पर मो. कफील उर रहमान, मौलाना अमजद, मौलाना खुर्शीद नदवी, डॉ. सैफुल्लाह खालिद, मौलाना कासमी जमाली, जियाउद्दीन अंसारी सहित कई जिलों से सैकड़ों प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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