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रांची: सुखदेवनगर इलाके में घरों को तोड़ने की प्रशासनिक कार्रवाई पर झारखंड उच्च न्यायालय ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। न्यायालय के इस आदेश ने उन दर्जनों परिवारों को बड़ी राहत दी है, जिनके सिर से आशियाना छिनने का खतरा मंडरा रहा था। इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजेश शंकर की एकल पीठ में हुई।
क्या है पूरा विवाद
यह मामला खादगढ़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित 48 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। मूल रूप से महादेव उरांव नामक व्यक्ति ने अपनी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद, अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट ने हेहल अंचल अधिकारी (CO) को जमीन खाली कराने का निर्देश दिया। इसी आदेश के आलोक में पिछले कुछ दिनों से जिला प्रशासन वहां बुलडोजर लेकर पहुंचा था और घरों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
हस्तक्षेप याचिका ने पलटा मामला
प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में रौनक कुमार सहित 11 लोगों ने हाईकोर्ट में हस्तक्षेप याचिका (Intervention Application) दाखिल की। याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष चौंकाने वाले तथ्य रखे:
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भारी निवेश: प्रभावित लोगों का दावा है कि उन्होंने इस जमीन के लिए करीब सवा करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
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सेटलमेंट एग्रीमेंट: निवासियों का कहना है कि उनके पास जमीन का बाकायदा सेटलमेंट एग्रीमेंट है और उन्होंने 5.25 लाख रुपये प्रति कट्ठा की दर से भुगतान किया है।
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तथ्यों को छिपाने का आरोप: याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मूल पक्षकार ने अदालत को पूरी जानकारी नहीं दी और उन्हें जानबूझकर मामले में प्रतिवादी नहीं बनाया गया, ताकि वे अपना पक्ष न रख सकें।
अदालत का सख्त रुख
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हेहल के अंचल अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे बताएं कि हस्तक्षेपकर्ताओं के आवेदनों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने दलीलें पेश कीं। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है, तब तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया है।

