Patna: मुंगेर जिले के रणगांव स्थित रत्नेश्वर नाथ मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के उद्देश्य से पर्यटन विभाग ने 9 करोड़ 94 लाख 59 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के पहले चरण के लिए 2 करोड़ 48 लाख 64 हजार 750 रुपये की निकासी और व्यय को भी मंजूरी दे दी गई है। योजना के तहत पहुंच पथ, पार्किंग, शौचालय, घाट, रोशनी और सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
पर्यटन विभाग की ओर से जारी स्वीकृति आदेश के अनुसार मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्य कराए जाएंगे। इसके तहत पहुंच पथ और पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी, ताकि मंदिर आने वाले लोगों को आवागमन और वाहन खड़े करने में सहूलियत हो। परिसर में शौचालय ब्लॉक और टिकटिंग व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। इसके अलावा घाट और सीढ़ियों का निर्माण कराया जाएगा।
परिसर का होगा सौंदर्यीकरण
योजना में मंदिर परिसर के समग्र विकास पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत लैंडस्केपिंग, कैंपस लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा मुख्य द्वार के निर्माण और सौंदर्यीकरण समेत अन्य कार्य प्रस्तावित हैं। इन सुविधाओं के विकास से मंदिर परिसर को व्यवस्थित करने और वहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन निगम करेगा काम
योजना को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम को सौंपी गई है। निगम निर्धारित कार्ययोजना और तकनीकी मानकों के अनुरूप निर्माण कार्य कराएगा। स्वीकृति आदेश में योजना को एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति पर भी नजर रखनी होगी।
मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता का बयान
बिहार की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ पौराणिक मठ-मंदिरों का सौंदर्यीकरण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इन धार्मिक स्थलों को बेहतर बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित कर पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख पहचान दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं को सुविधाजनक वातावरण मिलेगा और राज्य की धार्मिक विरासत को व्यापक पहचान मिलेगी। सरकार का प्रयास है कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थलों का विकास इस तरह किया जाए कि उनकी मूल पहचान बरकरार रहे और पर्यटकों को भी बेहतर अनुभव मिल सके।
— केदार प्रसाद गुप्ता, मंत्री, पर्यटन विभाग, बिहार




