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आदिवासी बेटी पर हाथ! निशा भगत को थप्पड़ मारने पर भड़का समाज

Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची में आदिवासी अस्मिता और सम्मान को लेकर एक बार फिर उबाल आ गया है। गुरुवार को कचहरी स्थित आर.आई.टी बिल्डिंग परिसर में केंद्रीय सरना समिति ने एक आपातकालीन प्रेस वार्ता का आयोजन किया। मामला बेहद गंभीर है—समिति की केंद्रीय

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Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची में आदिवासी अस्मिता और सम्मान को लेकर एक बार फिर उबाल आ गया है। गुरुवार को कचहरी स्थित आर.आई.टी बिल्डिंग परिसर में केंद्रीय सरना समिति ने एक आपातकालीन प्रेस वार्ता का आयोजन किया। मामला बेहद गंभीर है—समिति की केंद्रीय महिला अध्यक्ष निशा भगत के साथ प्रशासन द्वारा कथित तौर पर थप्पड़ मारने और दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा है। इस घटना ने पूरे आदिवासी समुदाय को झकझोर कर रख दिया है।

“मेरी जान चली जाए, पर संघर्ष नहीं रुकेगा”: निशा भगत

प्रेस वार्ता के दौरान पीड़ित महिला अध्यक्ष निशा भगत भावुक नजर आईं, लेकिन उनके इरादे फौलादी थे। उन्होंने दो टूक कहा, “रैयतों को न्याय दिलाने के लिए अगर मेरी जान भी चली जाए, तो मुझे गम नहीं, लेकिन मैं संघर्ष नहीं छोड़ूंगी।” वहीं केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने प्रशासन और सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन पर चौतरफा हमला हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ भू-माफिया जमीन लूट रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन मारपीट पर उतारू है।

पूरे समाज को थप्पड़; बर्खास्तगी की उठी मांग

समिति की प्रवक्ता एंजेल लकड़ा ने इस घटना को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यह हाथ निशा भगत पर नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज पर उठा है। उन्होंने कहा, “न्यायालय का आदेश अपनी जगह है, लेकिन एक आंदोलनकारी बेटी को थप्पड़ मारना कानूनन जुर्म है। पुलिस एफआईआर कर सकती थी, पर मार नहीं सकती।” समिति ने दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्य भर में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। बैठक में महासचिव संजय तिर्की, अमर तिर्की और सत्यनारायण लकड़ा सहित कई दिग्गज नेता मौजूद थे।

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