Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची के सुखदेव नगर थाना क्षेत्र स्थित महुआ टोली, खादगढ़ा में इन दिनों मातम और खौफ का माहौल है। दशकों से सिर छिपाने की जगह पा चुके इंदिरा आवास के 40 परिवारों के ऊपर बेघर होने की तलवार लटक रही है। रांची नगर निगम द्वारा आवास खाली करने के अचानक आए फरमान ने गरीब लाभुकों की रातों की नींद उड़ा दी है। इस पूरे मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब घर छिनने के डर से एक 55 वर्षीय लाभुक दिलेश्वर साहू की सदमे में मौत हो गई।
लालू प्रसाद यादव के निर्देश पर बने थे ये आशियाने: रानी कुमारी
राजद नेत्री रानी कुमारी ने इस मामले पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए रांची नगर निगम के कदम को ‘मानवता विरोधी’ करार दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1990 में एकीकृत बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के मौखिक निर्देश पर रांची नगर निगम ने ही इन पक्के मकानों का निर्माण कराया था और 40 पात्र लाभुकों को आवंटित किया था। रानी कुमारी ने सवाल उठाया कि जो आशियाना सरकारी प्रक्रिया के तहत मिला, उसे 30-40 साल बाद अवैध बताकर उजाड़ना कहाँ का न्याय है?
ठिठुरती ठंड में बेघर करना ‘जुल्म’, पहले बसाने का हो इंतजाम
राजद नेत्री ने जिला प्रशासन और नगर निगम से अपील की है कि झारखंड में पड़ रही कड़ाके की ठंड को देखते हुए इस कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि निगम को जमीन की जरूरत है और वह इन घरों को तोड़ना चाहता है, तो सबसे पहले इन परिवारों को कहीं और बसाने की मुकम्मल व्यवस्था की जानी चाहिए। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के गरीबों के घर ढहाना किसी अपराध से कम नहीं है।
दिलेश्वर साहू की मौत ने खड़ा किया बड़ा सवाल; सरकार से दखल की मांग
महुआ टोली के रहने वाले 55 वर्षीय दिलेश्वर साहू की मौत ने इस प्रशासनिक आदेश की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। रानी कुमारी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार को इस मामले में तुरंत दखल देना चाहिए। एक तरफ सरकार गरीबों को आवास देने की योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ दशकों से बसे हुए लोगों को बेघर किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पीड़ितों को न्याय नहीं मिला, तो राजद चुप नहीं बैठेगी।



