Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में वर्षों से संचालित ‘बिहार आई बैंक ट्रस्ट’ अब अपनी पुरानी पहचान छोड़कर नई पहचान अपनाने जा रहा है। राज्य गठन के करीब 26 साल बाद, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस संस्थान का नाम बदलकर ‘झारखंड आई बैंक’ करने का महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। मंगलवार को राजभवन (लोकभवन) में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया।
आधुनिक सुविधाओं और CSR फंड पर जोर
राज्यपाल ने आई बैंक ट्रस्ट के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि इस संस्थान को राज्य के एक विश्वसनीय और उत्कृष्ट नेत्र चिकित्सा केंद्र के रूप में स्थापित करना प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि ट्रस्ट ऐसा कार्य मॉडल तैयार करे जिससे उसे कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड अधिक मिल सके। इस राशि का उपयोग संस्थान में ‘एडवांस आई केयर’ और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों के विस्तार में किया जाएगा।
जरूरतमंदों को मिलेगा ‘आयुष्मान’ का लाभ
बैठक में राज्यपाल ने गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के हितों का ध्यान रखते हुए ट्रस्ट को जल्द से जल्द आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने का आदेश दिया। साथ ही, संस्थान के सुचारु और पेशेवर संचालन के लिए एक दक्ष ‘अस्पताल प्रबंधक’ की नियुक्ति पर भी बल दिया गया।
प्रशासनिक बदलाव और नियुक्तियां— बैठक के दौरान कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय भी लिए गए:
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डॉ. टीपी बर्णवाल को ट्रस्ट का नया ट्रस्टी नियुक्त किया गया है।
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संयुक्त सचिव पद से अजय जैन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया।
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ट्रस्ट की भूमि से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक कदम
साल 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बनने के बावजूद, यह संस्थान अपने पुराने नाम ‘बिहार आई बैंक’ के साथ ही कार्य कर रहा था। अब नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया न केवल एक प्रशासनिक सुधार है, बल्कि राज्य की अपनी अलग पहचान और स्वाभिमान से जुड़ा एक प्रतीकात्मक कदम भी है।
बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, वित्त सचिव प्रशांत कुमार और ट्रस्ट की सचिव डॉ. प्रणंति सिन्हा सहित कई गणमान्य अधिकारी उपस्थित थे।



