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ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल लाएगी रांची प्रशासन, 15 अप्रैल से शुरू होगा महा-अभियान

रांची: शिक्षा के स्तर को शत-प्रतिशत करने और ड्रॉपआउट (बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले) बच्चों को वापस कक्षाओं तक लाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। शनिवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने दीप प्रज्वलित कर “स्कूल रूआर-2026” (Back to

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रांची: शिक्षा के स्तर को शत-प्रतिशत करने और ड्रॉपआउट (बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले) बच्चों को वापस कक्षाओं तक लाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। शनिवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने दीप प्रज्वलित कर “स्कूल रूआर-2026” (Back to School) अभियान का विधिवत शुभारंभ किया।

कोई बच्चा न छूटे, यही है संकल्प

इस अभियान का मूल मंत्र है कि जिले का एक भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि “स्कूल रूआर” केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि छिजीत (Dropout) और अनामांकित बच्चों की पहचान कर उन्हें निकटतम स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए।

शिक्षक जाएंगे घर-घर, 13 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर बैठक

अभियान की रूपरेखा के अनुसार, 13 अप्रैल 2026 को जिले के सभी प्रखंडों में प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) की अध्यक्षता में विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसके बाद, 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक पूरे जिले में सघन अभियान चलेगा। इस दौरान स्कूलों के शिक्षक घर-घर जाकर सर्वे करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि हर बच्चा स्कूल की दहलीज तक पहुंचे।

आंगनवाड़ी से स्कूल तक का सफर

अभियान के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों में पढ़ रहे बच्चों के शत-प्रतिशत पारगमन (Transition) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि उनकी बुनियादी शिक्षा सुचारू रूप से प्राथमिक विद्यालयों में शुरू हो सके। उपायुक्त ने यह भी निर्देश दिया कि कक्षा 1 से 11वीं तक के प्रत्येक बच्चे का अगली कक्षा में नामांकन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, यू-डाइस (U-DISE) के ड्रॉप बॉक्स में मौजूद बच्चों को अनिवार्य रूप से स्कूल के डाटा सिस्टम से जोड़ने की जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंपी गई है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर उप विकास आयुक्त सौरभ भुवनिया और जिला शिक्षा पदाधिकारी विनय कुमार सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। जिला प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने आसपास के उन बच्चों की जानकारी साझा करें जो स्कूल नहीं जा रहे हैं, ताकि ‘अबुआ साथी’ हेल्पलाइन के जरिए उनकी मदद की जा सके।

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