Chatra News: सरकारी दस्तावेजों में कथित जालसाजी और लाखों रुपये के गबन के मामले में नामजद आरोपी अजीत कुमार सिंह की गिरफ्तारी नहीं होने और सरकारी पद पर उनकी निरंतर तैनाती को लेकर जिले में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामला सदर थाना कांड संख्या 88/2025 से जुड़ा है, जिसमें अजीत कुमार सिंह (34 वर्ष, पिता–अशोक सिंह, निवासी–कुरूमदारी) एवं इंदर नाथ कुमार (पिता–स्व. प्रभु राम, निवासी–बभने) को आरोपी बनाया गया है। दोनों आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की गंभीर एवं गैर-जमानती धाराओं 467, 468, 471, 409, 420 एवं 34 के तहत प्राथमिकी दर्ज है।
आरोप है कि सरकारी अभिलेखों में जालसाजी कर लाखों रुपये के गबन को अंजाम दिया गया। सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पहले मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) न्यायालय और बाद में झारखंड हाईकोर्ट द्वारा भी खारिज कर दी गई। इसके बावजूद मुख्य आरोपी अजीत कुमार सिंह की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है।जानकारी के अनुसार, आरोपी पहले लावालौंग प्रखंड में नाजिर के पद पर कार्यरत थे। बाद में उनका तबादला इटखोरी प्रखंड कर दिया गया, जहां वे वर्तमान में भी कार्यालय में कार्य कर रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब आरोपी नियमित रूप से सरकारी कार्यालय में उपस्थित हैं, तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जा चुकी है, तो पुलिस को कानून के अनुसार त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। मामले में अब तक गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन या संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष अभी तक सामने नहीं आया है। समाचार प्रकाशित होने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। जिले के लोगों ने पुलिस अधीक्षक एवं जिला प्रशासन से मामले में निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुरूप शीघ्र कार्रवाई करने तथा दोषियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की मांग की है।




