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‘जेन जी’ आंदोलन के बाद नेपाल में जेल तोड़कांड, फरार कैदी पकड़कर वापस सौंपा

Bihar News: नेपाल में ‘जेन जी’ आंदोलन ने ऐसा तांडव मचाया कि हालात बेकाबू हो गए। राजधानी काठमांडू से लेकर तराई के जिलों तक हिंसक प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़ का दौर चलता रहा। प्रदर्शनकारियों ने गुस्से में कई जेलों पर हमला कर बंदियों को बाहर

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Bihar News: नेपाल में ‘जेन जी’ आंदोलन ने ऐसा तांडव मचाया कि हालात बेकाबू हो गए। राजधानी काठमांडू से लेकर तराई के जिलों तक हिंसक प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़ का दौर चलता रहा। प्रदर्शनकारियों ने गुस्से में कई जेलों पर हमला कर बंदियों को बाहर निकाल दिया। नतीजा यह हुआ कि हजारों कैदी जेल से भाग निकले। कई ने भारत की सीमा पार करने की कोशिश की, लेकिन यहां पहले से अलर्ट भारतीय सुरक्षा बलों ने उन्हें पकड़ लिया और नेपाल पुलिस व सेना को सौंप दिया।

घटनाओं की शुरुआत मंगलवार से हुई, जब नेपाल के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों ने जेलों को निशाना बनाया। काठमांडू की नक्खू जेल, महोतरी जिले की जलेश्वर जेल, पोखरा जेल, रोतहट जिले की गौर जेल, सुनसरी जिले की झुमका जेल और सप्तरी जिला जेल पर हमला हुआ। झुमका जेल से तो 1098 कैदियों में से बड़ी संख्या में बंदी फरार हो गए। जेलर सुवास लामिछाने ने खुद इसकी पुष्टि की कि उपद्रवियों के बल प्रयोग से कैदी भाग निकले और हथियार व अन्य सामान भी ले गए।

काठमांडू की नक्खू जेल को तोड़ने के बाद प्रदर्शनकारियों ने वहां आग भी लगा दी। इसी जेल में पूर्व गृह मंत्री रवि लामिछाने बंद थे। बताया जा रहा है कि उनके समर्थक उन्हें जेल से बाहर निकालकर सीधे घर तक पहुंचाने में सफल रहे।

जेलों से कैदियों के फरार होने के बाद हालात इतने बेकाबू हुए कि नेपाली सुरक्षाकर्मी पीछे हट गए। इसका फायदा उठाकर कैदियों ने आसानी से भागने का मौका पा लिया। कई कैदी तो अपने निजी सामान और जेल के हथियार भी साथ ले गए। विराटनगर जेल पर भी बुधवार को हमला करने की कोशिश हुई, लेकिन नेपाली सेना ने मोर्चा संभालते हुए उसे विफल कर दिया।

इन हालात का सीधा असर भारत-नेपाल सीमा पर पड़ा। अररिया जिले से सटी जोगबनी सीमा और आसपास के इलाकों में दर्जनों कैदी भारत की ओर भागने लगे। सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कई कैदियों को पकड़ लिया और नेपाल की सेना के हवाले कर दिया। खबर लिखे जाने तक दर्जनों फरार बंदियों को पकड़ा जा चुका था।

सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चाक-चौबंद कर दी गई है। अररिया के जिलाधिकारी अनिल कुमार, पुलिस अधीक्षक अंजनी कुमार और एसएसबी 56वीं बटालियन के कमांडेंट शाश्वत कुमार खुद सीमा पर कैंप कर स्थिति पर नजर रख रहे हैं। अधिकारियों ने जवानों को सख्त निर्देश दिए हैं कि नेपाल से आने वाले हर संदिग्ध पर कड़ी निगरानी रखी जाए और पूरी तरह जांच के बाद ही किसी को भारतीय सीमा में प्रवेश की अनुमति दी जाए।

जेल ब्रेक की घटनाओं ने नेपाल सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है। नेपाल सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल ने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विराटनगर सहित कई जगहों पर सेना ने कर्फ्यू लगा दिया है ताकि हालात काबू में रखे जा सकें।

जेलों से कैदियों का फरार होना नेपाल की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। हजारों कैदियों के एक साथ भाग जाने से वहां की कानून व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है। भारतीय सीमा से लगे इलाकों में भी डर और सतर्कता दोनों माहौल में महसूस की जा रही है। स्थानीय लोग सुरक्षा बलों की तैनाती से राहत तो महसूस कर रहे हैं, लेकिन नेपाल में बिगड़े हालात को लेकर चिंता भी जाहिर कर रहे हैं।

भारत की ओर से सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है। एसएसबी और पुलिस की संयुक्त गश्ती लगातार चल रही है ताकि कोई भी फरार कैदी भारतीय इलाके में शरण न ले सके। जेल तोड़ने और आगजनी की घटनाओं ने भारत-नेपाल दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है।

फिलहाल, नेपाल के कई जेलों से भागे कैदी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। नेपाल पुलिस और सेना उनकी तलाश में जुटी है। वहीं भारतीय सुरक्षा बल भी सीमा पर हर पल अलर्ट मोड में हैं ताकि स्थिति और न बिगड़े।

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