रांची: स्थानीय नागरिकों के लिए नगर निगम एक बड़ी राहत लेकर आया है। शहर के वार्ड कार्यालयों को न केवल नया रूप दिया जा रहा है, बल्कि उन्हें इस तरह सुदृढ़ किया जा रहा है कि आम जनता को अपने छोटे-बड़े कामों के लिए मुख्य नगर निगम कार्यालय की दौड़ न लगानी पड़े। शनिवार को सहायक नगर आयुक्तों द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में इस अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई।
जमीनी स्तर पर दिखने लगा बदलाव
नगर निगम के इस कायाकल्प अभियान के तहत कई वार्डों में रंग-रोगन और मरम्मती का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि वार्ड संख्या 13, 14, 15, 16, 50 और 53 में सुदृढ़ीकरण का कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है। वहीं, वार्ड 34, 36, 47 और 48 में काम अंतिम चरण में है। अधिकारियों ने वार्ड 4 और 6 के शौचालयों की स्थिति देखते हुए वहां तत्काल मरम्मती कराने के कड़े निर्देश दिए हैं ताकि स्वच्छता मानकों का पालन हो सके।
पारदर्शिता और बचत का अनूठा मॉडल
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी लागत और कार्यप्रणाली है। नगर निगम यह सारा काम ‘इन-हाउस’ तरीके से भवन निर्माण विभाग (BCD) की अनुमोदित दरों पर करा रहा है। इससे न केवल बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है, बल्कि पारदर्शिता भी आई है। चौंकाने वाली बात यह है कि एक वार्ड कार्यालय को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाने में 1.5 लाख रुपये से भी कम का खर्च आ रहा है। यह मॉडल कम लागत में सरकारी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की दिशा में एक मिसाल है।
एक छत के नीचे मिलेंगी ये सेवाएं
वार्ड कार्यालयों के सुदृढ़ीकरण का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को उनके घर के पास ही बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना है। अब इन कार्यालयों के माध्यम से लोग आसानी से:
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साफ-सफाई से जुड़ी शिकायतों का पंजीकरण करा सकेंगे।
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विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवेदन दे सकेंगे।
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पानी के टैंकर या सेप्टिक टैंक की बुकिंग कर सकेंगे।
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अपने कर (Tax) का भुगतान कर सकेंगे।
नगर निगम का लक्ष्य सभी वार्ड कार्यालयों को स्वच्छ, डिजिटल रूप से सक्षम और पूर्णतः कार्यात्मक बनाना है। इस पहल से न केवल जनता का समय बचेगा, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आएगी।



