रांची : उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के मार्गदर्शन में बाल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शनिवार को हुई वर्चुअल बैठक में जिला प्रशासन ने सभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारियों (BDO) को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से कम से कम 10 ऐसे बच्चों का चयन करें, जिन्हें तुरंत सहायता की आवश्यकता है। इस कार्य के लिए 31 जनवरी 2026 तक की समय-सीमा तय की गई है।
उप विकास आयुक्त (DDC) सौरभ कुमार भुवनिया ने स्पष्ट किया है कि ‘प्रायोजन (Sponsorship) योजना’ केवल एक सरकारी कागज़ नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए सुरक्षा कवच है जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है या जो गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
कौन होंगे पात्र
यह योजना उन बच्चों के लिए है जिनकी आयु 18 वर्ष से कम है और जिनके परिवार की वार्षिक आय ₹75,000 से अधिक नहीं है। योजना के दायरे में विशेष रूप से इन श्रेणियों को रखा गया है:
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जिनके माता-पिता की मृत्यु हो गई हो या जिन्होंने बच्चों को छोड़ दिया हो।
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जिनके अभिभावक कैंसर, HIV/AIDS या कुष्ठ रोग जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हों।
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जो बच्चे बाल श्रम, बाल विवाह या तस्करी (trafficking) का शिकार हुए हों।
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जिनके माता-पिता 100% दिव्यांग हों या जेल में सजा काट रहे हों।
सहायता का स्वरूप
प्रशासन का लक्ष्य इन बच्चों को केवल वित्तीय मदद देना ही नहीं, बल्कि उनकी शिक्षा, पोषण और चिकित्सा संबंधी जरूरतों को पूरा करना है। चयनित बच्चों को मिलने वाली राशि सीधे उनके परिवार या अभिभावक के खाते में भेजी जाएगी ताकि उनके विकास में कोई अड़चन न आए। बैठक में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी और सामाजिक सुरक्षा कोषांग के अधिकारियों को भी इस प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के निर्देश दिए गए हैं।



