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रूपी सोरेन के निधन पर पीएम मोदी ने जताया दुख, संताली में ओल चिकी लिपि में दी श्रद्धांजलि

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। रूपी सोरेन का बुधवार शाम रांची के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। गुरुवार को पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर हिंदी

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रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। रूपी सोरेन का बुधवार शाम रांची के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। गुरुवार को पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर हिंदी, अंग्रेजी और संताली भाषा में शोक संदेश जारी किया। उन्होंने संताली में ओल चिकी लिपि का इस्तेमाल किया।

पीएम मोदी ने अपने संदेश में रूपी सोरेन के निधन पर शोक जताते हुए हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन और पूरे परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रूपी सोरेन ने जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण के लिए काम किया।

करीब 80 साल की उम्र में निधन

रूपी सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन की पत्नी थीं। करीब 80 साल की उम्र में बुधवार शाम लगभग 8:30 बजे रांची के हिल व्यू अस्पताल में उनका निधन हुआ। सांस लेने में परेशानी के बाद उन्हें 18 सितंबर से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।

हेमंत सोरेन ने भी मां को याद किया

मां के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी भावुक संदेश साझा किया था। उन्होंने कहा था कि पिता शिबू सोरेन के निधन के बाद मां उनकी सबसे बड़ी छांव थीं। अब वह भी उन्हें छोड़कर चली गईं। झामुमो ने रूपी सोरेन को संघर्ष, बलिदान और धैर्य का प्रतीक बताया।

संताली में संदेश को मिला खास महत्व

पीएम मोदी की ओर से संताली भाषा में ओल चिकी लिपि में शोक संदेश लिखे जाने को संताल समुदाय के बीच खास महत्व वाला माना जा रहा है। संताली झारखंड समेत कई राज्यों में बोली जाती है और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से एक है।

ओल चिकी लिपि को पंडित रघुनाथ मुर्मू ने 1925 में विकसित किया था। इसके बाद संताली भाषा को अपनी अलग लिखित पहचान मिली। पीएम मोदी पहले भी जनजातीय पर्वों और खास मौकों पर संताली भाषा में संदेश साझा कर चुके हैं।

नेमरा में होगा अंतिम संस्कार

रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार गुरुवार को रामगढ़ जिले के नेमरा में किया जाएगा। अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात की व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में नेताओं, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के अंतिम विदाई में शामिल होने की संभावना है।

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