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Kasmar news:जनजातीय कुड़मी समुदाय द्वारा मकर संक्रांति/ टुसू पर्व के दुसरे दिन गुरुवार को आखाइन जातरा के दिन किसान अपने-अपने खेतों में हल-बैल ले जाकर पांच बार हल घुमाकर कृषि कार्य प्रारंभ “हार-पून्हा” नेग के तौर पर किया गया । इस दिन को कुड़मि एंव आदिवासी जनजातीय समुदाय किसान खास दिन मानते है। क्योंकि कुडमाली कैलेंडर के अनुसार आखाइन जातरा को ही नये साल का प्रथम दिन और माघ माह को साल पहला माह माना गया है। इस दिन को किसान नववर्ष के रुप में मनाते है।
किसान हल-बैलों को कम-से कम पांच पाक (चक्कर) अपने खेत में जोत कर जब घर लौटे तो पत्नी या मां द्वारा हल-बैलों को चुमान और हार-वाहा का पैर धुलाई कर स्वागत किया। तीन चोट गोबरडिंग गोबर एकत्रित गड्ढा में भी कुदाल चलाया। यानि जैविक खाद को भी तैयार किया। कुड़मी समुदाय के दीपक पुनरियार, सुकदेव राम, मिथिलेश कुमार महतो, चाॅदमुख महतो, मनु राम गुलियार, जानकी महतो, तथा हेमंत हिंदयार ने बताया कि आखाइन जातरा के दिन हर तरह से शुभ माना जाता है।
बड़े बुजुर्ग के कथानुसार इस दिन नया घर बनाने के लिए बुनियादी खोदना या शुरू करना अति उत्तम दिन माना गया है। इसमें कोई पाँजी-पाथि का जरूरत नहीं पडती है। आखाइन जातरा के बाद से ही फागुन महिना तक सगे-संबंधी, रिश्तेदारों के घर “पीठा” पहुँचाये जायेंगे। पीठा पहुंचाने की इस नेग-रिवाज को “कुटुमारी” कहा जाता है। विवाह योग्य लड़के-लड़कियों के लिए इसी शुभ दिन यानि आखाइन जातरा से ही शादी के लिए लड़का/लड़की देखना शुरू हो जाता है। नये दुकान, नये गृह प्रवेश या कोई भी नया काम कुड़मालि नेगाचारि से ये दिन अत्यंत महत्वपूर्ण एंव शुभ माना जाता है ।

