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अमेजन की अनोखी मां; जंगली जानवरों को अपना दूध पिलाकर पालती हैं महिलाएं!

Brasilia, (Brazil): दुनिया में आज भी कुछ ऐसी अनूठी जनजातियां मौजूद हैं जिनका पूरा जीवन जंगल, वन्यजीवों और प्रकृति के साथ पूरी तरह घुला-मिला हुआ है। ब्राजील के अमेजन जंगलों में रहने वाली ‘आवा जनजाति’ भी अपने इसी अनोखे रहन-सहन और जानवरों के प्रति अपने

जानवरों को स्तनपान कराती महिलाएं
जानवरों को स्तनपान कराती महिलाएं

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Brasilia, (Brazil): दुनिया में आज भी कुछ ऐसी अनूठी जनजातियां मौजूद हैं जिनका पूरा जीवन जंगल, वन्यजीवों और प्रकृति के साथ पूरी तरह घुला-मिला हुआ है। ब्राजील के अमेजन जंगलों में रहने वाली ‘आवा जनजाति’ भी अपने इसी अनोखे रहन-सहन और जानवरों के प्रति अपने खास मातृत्व भाव के कारण हमेशा चर्चा में रहती है। इस जनजाति की महिलाएं अनाथ जंगली जानवरों के बच्चों को बिल्कुल अपने सगे बच्चों की तरह पालती हैं और उन्हें अपना स्तनपान तक कराती हैं। अमेजन के बेहद घने जंगलों में रहने वाली इस आवा जनजाति को ‘गुआजा ट्राइब्स’ के नाम से भी जाना जाता है और इनका पूरा जीवन पूरी तरह से जंगलों पर ही निर्भर है।

यह जनजाति मूल रूप से एक खानाबदोश शिकारी समुदाय मानी जाती है। इनके जीवन की सबसे दिलचस्प और दिल को छू लेने वाली बात वन्यजीवों के साथ इनका गहरा भावनात्मक और आत्मीय रिश्ता है। यहाँ की महिलाएं बंदर, गिलहरी, जंगली सूअर और दूसरे तमाम जानवरों के अनाथ बच्चों को अपने परिवार का एक अभिन्न हिस्सा बना लेती हैं। वे इन बेजुबान जानवरों की देखभाल ठीक उसी तरह करती हैं जैसे कोई मां अपने नवजात बच्चे की करती है। कई बार वे उन्हें अपना दूध पिलाकर बड़ा भी करती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, ये जानवर भी इंसानों के इस निश्छल प्यार का जवाब बेहद खास और वफादार तरीके से देते हैं। जब ये जानवर बड़े हो जाते हैं, तो जंगलों में ऊंचे-ऊंचे पेड़ों पर चढ़कर फल और जरूरी औषधीय जड़ी-बूटियां नीचे लाकर इन आदिवासियों की काफी मदद करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘सर्वाइवल इंटरनेशनल’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 500 साल पहले इस आवा जनजाति की आबादी हजारों में हुआ करती थी, लेकिन अब पूरी दुनिया में इनके केवल 500 लोग ही जीवित बचे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन बचे हुए लोगों में से भी लगभग 100 लोगों का बाहरी आधुनिक दुनिया से आज तक कोई संपर्क नहीं हुआ है। जंगलों में लगातार हो रही अवैध कटाई, अवैध खनन और भू-माफियाओं के बढ़ते कब्जों के कारण आज इन आदिवासियों के घर और इनका जीवन दोनों ही बहुत गहरे संकट में पड़ गए हैं। इंसान और जंगली जानवरों के बीच का ऐसा बेमिसाल तालमेल आज के आधुनिक समाज के लिए किसी बड़े अजूबे से कम नहीं माना जाता। हालांकि, प्रकृति के इतने करीब रहने वाली इस अनूठी जनजाति का अस्तित्व अब लुप्त होने की कगार पर है।

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