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बिहार के 1 करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाने का बड़ा प्लान, CM सम्राट का ऐलान

बिहार के 1 करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाने का मेगा प्लान: मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 7 हजार से अधिक लाभुकों के खाते में ट्रांसफर हुई पहली किस्त

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Patna: बिहार को आत्मनिर्भर और औद्योगिक रूप से समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। बापू सभागार में उद्योग विभाग की ओर से आयोजित एक भव्य समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘मुख्यमंत्री उद्यमी योजना’ के तहत चयनित लाभुकों का एक दिवसीय उन्मुखीकरण और प्रथम किस्त की राशि वितरण कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत चयनित लाभुकों को सांकेतिक चेक प्रदान किया और साथ ही प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय किस्त के 7 हजार से अधिक लाभुकों के खातों में सीधे राशि अंतरित की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलों में स्थापित नए एमएमएसएमई (MSME) केंद्रों का उद्घाटन किया तथा ‘बिहार एमएसएमई नीति 2026’, ‘मुख्यमंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग कलस्टर विकास योजना-2026’ और ‘सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद् नियामावली 2026’ पर आधारित आधिकारिक पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया।

1 करोड़ परिवारों को उद्यमी परिवार बनाने का लक्ष्य

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार के 1 करोड़ परिवारों को उद्यमिता और आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बिहार को समृद्ध बनाने के सपने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने के लिए अगले पांच वर्षों में राज्य में उद्योग, रोजगार, शिक्षा, आधारभूत संरचना और ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एमएसएमई क्षेत्र के लिए घोषित 10,000 करोड़ रुपये के प्रावधान का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें से कम से कम एक-दसवां हिस्सा बिहार को मिलने की पूरी संभावना है, जिससे राज्य के छोटे और मध्यम उद्योगों को अभूतपूर्व गति मिलेगी। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया।

45,000 उद्यमी तैयार कर रही है सरकार

मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत राज्य में बड़े पैमाने पर नए बिजनेस और स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के तहत एमएमएसएमई के माध्यम से कुल 45,000 उद्यमी तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें:

14,000 उद्यमी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं।

10,000 उद्यमी अति पिछड़ा वर्ग से हैं।

9,500 महिला उद्यमी शामिल हैं।

9,000 युवा और 2,500 अल्पसंख्यक उद्यमी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।

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इस पूरी योजना के तहत राज्य सरकार 3,500 करोड़ रुपये की राशि खर्च कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में धक्के खाने की जरूरत न पड़े, इसके लिए स्थानीय स्तर पर ही उद्योगों का जाल बिछाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह है कि बिहार का युवा ‘नौकरी मांगने वाला’ नहीं, बल्कि ‘नौकरी देने वाला उद्यमी’ बने।

सरकारी खरीद में बिहार के उत्पादों को प्राथमिकता और निवेश के बड़े लक्ष्य

स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक और ऐतिहासिक फैसला लिया है। ‘पब्लिक प्रोक्योरमेंट पॉलिसी एक्ट’ के तहत बिहार में निर्मित वस्तुओं की 25 से 40 प्रतिशत तक सरकारी खरीद अनिवार्य रूप से की जाएगी। इसके अलावा, राज्य में औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए पीपीपी (PPP) मोड में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले पाँच वर्षों में उद्योगों की बिजली की मांग को पूरा करने के लिए 20,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम तेजी से चल रहा है।

शिक्षा, ऊर्जा और पर्यटन के क्षेत्र में भी बड़े ऐलान

विद्यार्थियों के लिए सौगात: राज्य में 700 स्थानों पर सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) खोले गए हैं, जहाँ छात्रों को NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा मिलेगी। साथ ही ‘विद्यार्थी साथी’ ऐप के जरिए 24×7 ऑनलाइन ट्यूटर की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अगले वर्ष से राज्य के 211 डिग्री कॉलेजों में विज्ञान संकाय की पढ़ाई भी शुरू होगी।

रोप-वे और पर्यटन: पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अगले दो वर्षों में राज्य के 20 महत्वपूर्ण स्थानों पर रोप-वे का निर्माण किया जाएगा। मरीन ड्राइव से सोनपुर के बीच रोप-वे बनाने के लिए एक निजी कंपनी ने रुचि दिखाई है।

सौर ऊर्जा: कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए आगामी एक वर्ष के भीतर राज्य के सभी कृषि फीडरों को 100 प्रतिशत सौर ऊर्जा (Solar Energy) से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

कार्यक्रम की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री ने परिसर में ‘मुख्यमंत्री उद्यमी योजना’ के तहत उद्यमियों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया और उनके उत्पादों की गुणवत्ता व बाजार में उनकी मांग की जानकारी ली। इस अवसर पर उद्योग एवं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. जमां खान, पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद, अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री लखेन्द्र कुमार रोशन, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार समेत कई वरीय अधिकारी और बड़ी संख्या में उद्यमी उपस्थित रहे।

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