Patna: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए दो महत्वपूर्ण मामलों में कड़े और न्यायसंगत फैसले सुनाए हैं। इन मामलों में फ्लैट में वादा की गई सुविधाएं न देने पर बिल्डर पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ वाहन दुर्घटना का बीमा दावा अनुचित तरीके से खारिज करने पर बीमा कंपनी को भी फटकार लगाई गई है।
जिला उपभोक्ता आयोग के दो महत्वपूर्ण फैसले
1. फ्लैट में वादे के मुताबिक सुविधाएं न देने पर बिल्डर को मुआवजा
उपभोक्ता शिकायत संख्या 39/2017 (सजल कुमार शर्मा बनाम आर.डी. इको डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य) के मामले में आयोग ने 8 अक्टूबर 2026 को अपना निर्णय सुनाया।
शिकायत: फ्लैट का कब्जा मिलने के बावजूद बिक्री समझौते में तय की गई लिफ्ट, जनरेटर, अग्निशमन (फायर फाइटिंग) उपकरण और अतिरिक्त विद्युत बिंदु जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई थीं, जिसके कारण शिकायतकर्ता को इन्हें अपने खर्च पर व्यवस्थित करना पड़ा।
आयोग का आदेश: आयोग ने विपक्षी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में 10 लाख रुपये, मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न के लिए 1 लाख रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 25,000 रुपये यानी कुल 11.25 लाख रुपये का भुगतान करें।
समय-सीमा: इस आदेश का पालन प्रति प्राप्त होने की तिथि से 120 दिनों के भीतर करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर इसके बाद 18 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज देना होगा।
2. अनुचित तरीके से बीमा दावा खारिज करना सेवा में कमी
दूसरे मामले में उपभोक्ता शिकायत संख्या 320/2019 (जूही कुमारी बनाम रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड) के अंतर्गत आयोग ने 29 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया।
मामला: शिकायतकर्ता की स्कॉर्पियो कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी जिसकी मरम्मत पर 85,092 रुपये खर्च हुए थे। बीमा कंपनी ने ‘नो क्लेम बोनस’ (NCB) से जुड़ी कथित गलत जानकारी का हवाला देकर 31 मई 2019 को उनका दावा खारिज कर दिया था।
आयोग का निर्णय: आयोग ने भारतीय मोटर टैरिफ के प्रावधान जीआर-27 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि नए बीमाकर्ता द्वारा नो क्लेम बोनस दिए जाने की स्थिति में पूर्व बीमाकर्ता से 21 दिनों के भीतर सत्यापन किया जाना चाहिए था, जो इस मामले में नहीं किया गया।
भुगतान का निर्देश: आयोग ने बीमा कंपनी के अस्वीकृति पत्र को रद्द करते हुए वाहन की मरम्मत के लिए 85,092 रुपये, 31 मई 2019 से वास्तविक भुगतान तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक पीड़ा के लिए 20,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 10,000 रुपये देने का आदेश दिया है। इस आदेश का पालन 60 दिनों के भीतर करना होगा।
यह दोनों महत्वपूर्ण आदेश जिला उपभोक्ता आयोग, पटना के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र एवं सदस्य रजनीश कुमार द्वारा पारित किए गए हैं, जो यह साबित करते हैं कि उपभोक्ताओं के साथ किए गए समझौतों और सेवा संबंधी दायित्वों का पालन करना बेहद जरूरी है।




