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‘दबंग’ देख मुस्कुराए मरीज, सिनेमाई थैरेपी से मानसिक स्वास्थ्य संवारने की अनूठी कोशिश

रांची के रिनपास में शुरू हुआ 'Movie Magic', सलमान खान की 'दबंग' की स्क्रीनिंग से मरीजों के चेहरों पर लौटी रौनक

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रांची: मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश के अग्रणी संस्थानों में शुमार ‘रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकाइट्री एंड अलाइड साइंसेज’ (RINPAS) ने उपचाराधीन मरीजों के जीवन में सकारात्मकता और उल्लास भरने के उद्देश्य से एक मानवीय व संवेदनशील पहल शुरू की है। संस्थान में मरीजों के समग्र कल्याण, मानसिक ताजगी और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए नवप्रारंभित विशेष अभियान “RINPAS Movie Magic” का भव्य आगाज किया गया। इस अनूठे कार्यक्रम के तहत आयोजित पहली फिल्म स्क्रीनिंग में मरीजों को ब्लॉकबस्टर बॉलीवुड फिल्म “दबंग” दिखाई गई।
अक्सर अस्पतालों के वार्डों में सीमित रहने वाले मरीजों के लिए यह स्क्रीनिंग किसी जादुई अनुभव से कम नहीं रही। जैसे ही बड़े पर्दे पर चुलबुल पांडे के मजेदार संवाद और ऊर्जावान गाने गूंजे, पूरा हॉल तालियों और ठहाकों से जीवंत हो उठा। आम तौर पर तनाव, चिंता या अवसाद से जूझ रहे मरीजों के चेहरे पर यह फिल्म देखकर खिली स्वाभाविक मुस्कान इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता रही। मरीजों ने न केवल फिल्म का भरपूर आनंद लिया, बल्कि साथी मरीजों और स्टाफ के साथ बैठकर सिनेमा देखने का एक सुखद पारिवारिक माहौल भी महसूस किया।

मनोरंजन और सिनेमाई थैरेपी से संवरती सेहत

मनोचिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं और नियमित काउंसलिंग के साथ-साथ मनोरंजन, कला और सिनेमा जैसी गतिविधियां मरीजों की रिकवरी में उत्प्रेरक (कैथार्सिस) की भूमिका निभाती हैं। इसे एक तरह की ‘सिनेमा थैरेपी’ भी कहा जा सकता है, जो मस्तिष्क में डोपामाइन और एंडोर्फिन जैसे ‘हैप्पी हार्मोन्स’ को सक्रिय करती है। इस प्रकार की रचनात्मक सहभागिता से मरीजों के भीतर का एकाकीपन, मानसिक तनाव और नकारात्मक विचार दूर होते हैं और उनमें जीवन के प्रति नई आशा का संचार होता है।
रिनपास प्रबंधन के अनुसार, यह पहल केवल एक बार का मनोरंजन कार्यक्रम नहीं है, बल्कि मरीजों को खुशहाल वातावरण उपलब्ध कराने और उन्हें मुख्यधारा के समाज के करीब लाने का एक निरंतर और सार्थक प्रयास है। संस्थान का लक्ष्य भविष्य में भी ऐसी प्रेरक, हास्यप्रद और सकारात्मक फिल्मों की नियमित स्क्रीनिंग आयोजित करना है, जिससे मरीजों का मानसिक संतुलन तेजी से सुधरे और वे मुस्कुराते हुए समाज में अपनी नई शुरुआत कर सकें।
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