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World News: स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग में एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसने कार्यस्थल पर होने वाले व्यवहार को लेकर बड़ी बहस खड़ी कर दी है। यहां 64 वर्षीय मॉरीन हाउईसन नाम की डेंटल नर्स को अपने सहकर्मी की लगातार रूड और अपमानजनक हरकतों के कारण पैनिक अटैक झेलना पड़ा। मामला कोर्ट तक पहुंचा और ट्रिब्यूनल ने हाउईसन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें करीब 30 लाख रुपये का मुआवजा दिलाया।
हाउईसन पिछले 40 साल से दंत चिकित्सा के क्षेत्र में काम कर रही थीं। उन्होंने बताया कि क्लिनिक में नई डेंटल थैरेपिस्ट जिसना इकबाल के आने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। इकबाल भारत से थीं और डेंटिस्ट की पढ़ाई कर चुकी थीं, लेकिन यूके में प्रैक्टिस की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने रिसेप्शन ड्यूटी अपने हाथ में ले ली और अक्सर हाउईसन को नजरअंदाज करते हुए आंखें घुमातीं या अपमानजनक रवैया अपनातीं।
सितंबर 2024 में हालात और बिगड़ गए, जब हाउईसन काम के दौरान भावनात्मक रूप से टूट गईं। उन्होंने सहकर्मियों से कहा कि अब उन्हें क्लीनर की तरह ट्रीट किया जा रहा है। अगले ही दिन जब उनकी शिफ्ट शुरू हुई, इकबाल ने रिसेप्शन छोड़ने से भी इनकार कर दिया। बढ़ते तनाव और प्रबंधन की चुप्पी ने हाउईसन की स्थिति और खराब कर दी।
एडिनबर्ग एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के बाद माना कि हाउईसन के साथ लगातार बुलींग, आइसोलेशन और अपमानजनक व्यवहार हुआ है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कार्यस्थल पर आंखें घुमाना भी बुलींग माना जा सकता है, क्योंकि इसका मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। इसी आधार पर हाउईसन को 25,254 पाउंड यानी करीब 30 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया।

