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Pakur News: झारखंड के पाकुड़ जिले के कई गांवों में पिछले दो दिनों से एक ही विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है—सरकारी राशन कार्ड। आपूर्ति विभाग की ओर से 872 अपात्र कार्डधारियों को भेजे गए नोटिस ने उन घरों के दरवाजों पर दस्तक दी है, जहाँ सालों से सरकारी अनाज तो मिलता रहा, लेकिन पात्रता की जांच कभी नहीं हुई। नोटिस मिलते ही माहौल पूरी तरह से बदल गया है; लोग घबराए हुए हैं और अपने कार्ड लेकर चुपचाप सरकारी कार्यालयों का रुख कर रहे हैं।
नोटिस में केवल दो दिन के भीतर जवाब माँगा गया है। यह देखते ही कई लोगों को पहली बार यह एहसास हुआ कि गलत जानकारी देकर सरकारी अनाज लेना कितना भारी पड़ सकता है।
इनकम टैक्स और चार पहिया वाहन वाले भी थे लिस्ट में
विभाग की सूची में शामिल कई कार्डधारी ऐसे हैं, जिनके घरों के बाहर बाकायदा चार पहिया वाहन खड़े रहते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो नियमित रूप से इनकम टैक्स और जीएसटी तक भरते हैं, या छोटे-मोटे उद्यम चलाते हैं। बावजूद इसके, ये सभी लोग वर्षों से गरीबी रेखा के नीचे वालों के लिए बने राशन कार्ड का फायदा उठा रहे थे।
गांवों में अब सबसे बड़ी चर्चा यह है कि “क्या अब पैसा लौटाना पड़ेगा?”
बाजार दर पर वसूली और 12% ब्याज का डर
नोटिस में यह बात साफ लिखी गई है कि अपात्र पाए जाने पर विभाग बाजार दर के हिसाब से वसूली करेगा, और उस पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज भी वसूला जाएगा। यह सुनते ही कई परिवारों को अपनी पिछली गलतियां याद आने लगी हैं। लोग पिछली प्राप्त की गई अनाज की मात्रा का हिसाब लगा रहे हैं, क्योंकि वसूली शुरू होने पर यह रकम लाखों तक पहुँच सकती है।
यही वजह है कि आपूर्ति कार्यालयों में कार्ड सरेंडर करने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई है। कई लोग अब बिना और परेशानी मोल लिए चुपचाप कार्ड जमा कर देना ही बेहतर मान रहे हैं।
विभाग का कहना है कि पात्रता नियमों के उल्लंघन पर अब और ढील नहीं दी जाएगी। इस सख्ती ने एक साफ संदेश दिया है कि जिन्होंने अपनी वास्तविक आय और संपत्ति की जानकारी छुपाई, उन्हें जवाब देना होगा। विभाग का मानना है कि इस जांच से सिस्टम में अधिक पारदर्शिता आएगी और इसका सीधा असर वास्तव में जरूरतमंद परिवारों पर पड़ेगा, जिन्हें अब उनका हक मिल सकेगा।

