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World News: पाकिस्तान के सियासी इतिहास में कई किरदार आते-जाते रहे, पर एक नाम आज भी रहस्य, शक्ति और विवाद का केंद्र बना हुआ है- अकलीम अख्तर, जिन्हें पूरा देश ‘जनरल रानी’ के नाम से जानता था। उनकी कहानी किसी फिल्म की तरह है- रोमांच, साजिश, सत्ता की भूख, रिश्तों की हलचल और अंत में अचानक पतन। 1960 और 70 के दशक में वे पाकिस्तान की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में गिनी जाती थीं।
पाकिस्तान के सियासी इतिहास में सबसे ताकतवर महिला थी जनरल रानी- 1960-70 के दशक में वे याह्या खान की सबसे करीबी रहीं, वे उनके दीवाने थे?

जनरल याह्या की कमजोरी बनीं अकलीम, सत्ता का रास्ता इसी से खुला
अकलीम का जीवन बिल्कुल साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ था। 1930 के दशक में पंजाब के गुजरात (अब पाकिस्तान) के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म लेने वाली यह लड़की शुरू से ही आत्मविश्वासी और बिंदास स्वभाव की थी। कम उम्र में शादी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से हुई, पर वहीं से संघर्ष शुरू हो गया। पति की मारपीट, आर्थिक तंगी और टूटते रिश्ते ने उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
1963 के आसपास पहाड़ों पर छुट्टी मनाने गई थीं, वहीं पति से विवाद हुआ और उसी दिन उन्होंने जिंदगी की दिशा बदल दी।
करांची से लाहौर तक, नाइट क्लबों की दुनिया में बनाई अपनी पहचान
अकलीम दो बच्चों- बेटी अरूसा और बेटे- को लेकर करांची, लाहौर और रावलपिंडी के क्लबों की दुनिया में उतर गईं। यह वह जगह थी जहां पाकिस्तान के फौजी, अमीर उद्योगपति, राजनेता और बड़े अफसर रातें बिताते थे। अकलीम ने न खुद शराब पी, न डांस किया, पर पार्टी ऑर्गनाइजर बनकर लोगों के बीच अपना नेटवर्क जमाना शुरू किया।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था- “मैं मर्दों की कमजोरियां पहचानती थी। उन्हें ऐसी सुंदर लड़कियां देती थी जो उनकी जरूरत के मुताबिक हों।”
उनकी चालाकी काम कर गई। धीरे-धीरे वे पाकिस्तान की सत्ता के गलियारों का हिस्सा बन गईं।
1969 में याह्या खान से मुलाकात और वहां से सत्ता पर पकड़
1969 में अयूब खान के हटने के बाद जनरल याह्या खान राष्ट्रपति बने। एक पार्टी में याह्या टॉयलेट की ओर जा रहे थे, तभी अकलीम ने बातचीत शुरू की। नशे में धुत याह्या को अकलीम की बातों में कुछ ऐसा दिखा कि वहीं से दोनों की नजदीकियां बढ़ती चली गईं।
कुछ समय में वे याह्या खान की सबसे भरोसेमंद साथी बन गईं, इतनी कि उन्हें ‘जनरल रानी’ कहकर बुलाया जाने लगा।
कुछ लोगों का दावा है कि याह्या खान सेना चलाते थे, जबकि अकलीम- रिश्ते, पोस्टिंग, प्रमोशन और तमाम फैसले प्रभावित करती थीं। उनके इशारे पर किसी को नौकरी मिल जाती, किसी का ट्रांसफर रुक जाता। सत्ता की चाबी उनके हाथों में थी।
एक रात की घटना जिसने याह्या को उनका दीवाना बना दिया
एक किस्सा बेहद मशहूर है- रात दो बजे याह्या अकलीम के पास पहुंचे। उन्हें नूरजहां का गाना सुनना था। अकलीम ने उसी रात फ्लाइट बुक की, होटल का सूट रिजर्व किया और सुबह तक लाइव रिकॉर्डिंग भी करवा दी। यह वही पल था जब याह्या ने उन्हें अपने जीवन का अहम हिस्सा बना लिया।
कहा जाता है कि पाकिस्तान–भारत युद्ध 1971 के दौरान भी याह्या का ध्यान रणनीति से ज्यादा अकलीम पर रहता था। यही वह दौर था जब उनकी आलोचना बढ़ी और सत्ता की पकड़ ढीली पड़ने लगी।
अरूसा आलम- मां से आगे बढ़ी कहानी भारत तक पहुंची
अकलीम की असली विरासत आगे जाकर उनकी बेटी अरूसा आलम बनीं, जो भारत के पंजाब की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बनीं। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से उनके रिश्तों ने पंजाब की राजनीति में अलग ही हलचल पैदा की।

